छत्तीसगढ़

 दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव पर वेतन गबन का आरोप, गिरफ्तारी के बाद निजी मुचलके पर मिली रिहाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी के वेतन में कथित गड़बड़ी के मामले में कुलसचिव को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पूछताछ के बाद उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी को निर्धारित वेतन का केवल छोटा हिस्सा दिया जाता था, जबकि शेष राशि कथित रूप से दूसरे खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के बाद पुलिस ने कुलसचिव को गिरफ्तार किया, हालांकि बाद में उन्हें निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

महिला कर्मचारी की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

मामले की शुरुआत तब हुई जब विश्वविद्यालय में कार्यरत एक दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी ने अपने वेतन को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की। शिकायत में वेतन भुगतान में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की। समिति ने दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

नियमित वेतन के बजाय दी जाती थी कम राशि

जांच में सामने आया कि संबंधित कर्मचारी को सरकारी नियमों के अनुसार हर महीने निर्धारित वेतन मिलना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि उसे वास्तविक भुगतान का केवल एक छोटा हिस्सा ही दिया जाता था।

शिकायत के अनुसार शेष धनराशि कथित रूप से डिजिटल माध्यमों से दूसरे खाते में स्थानांतरित कराई जाती थी। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय लेनदेन की विस्तार से जांच कर रही है।

घरेलू काम कराने के भी लगे आरोप

जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि महिला कर्मचारी से विश्वविद्यालय के कार्यों के अलावा निजी स्तर पर घरेलू काम भी कराया जाता था। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है कि कहीं सेवा की शर्तों का दुरुपयोग तो नहीं किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त कार्रवाई भी की जा सकती है।

जांच रिपोर्ट और बैंक रिकॉर्ड बने कार्रवाई का आधार

पुलिस के अनुसार विश्वविद्यालय की जांच समिति की रिपोर्ट, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद मामला दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच में कथित वित्तीय गड़बड़ी का संकेत मिलने पर आरोपी से पूछताछ की गई।

पूछताछ के बाद पुलिस ने कुलसचिव को गिरफ्तार किया। हालांकि मामला जमानती श्रेणी का होने के कारण कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें थाने से ही निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस कर रही है पूरे मामले की विस्तृत जांच

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितता कितने समय से चल रही थी और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी या नहीं। पुलिस वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है और मामले की जांच जारी है।

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