Pakistan-China Defence: सीमा पर चीन की SH-15 तोपों से बढ़ी पाकिस्तान की ताकत, भारत भी आधुनिक आर्टिलरी से दे रहा कड़ा जवाब
भारत-पाकिस्तान सीमा पर सैन्य तैयारियों के बीच पाकिस्तान ने चीन से प्राप्त SH-15 सेल्फ-प्रोपेल्ड आर्टिलरी सिस्टम की तैनाती बढ़ा दी है। लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम यह हथियार पाकिस्तान की फायरपावर को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। दूसरी ओर भारत भी स्वदेशी और अत्याधुनिक तोप प्रणालियों के जरिए अपनी जवाबी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है, जिससे सीमा पर रणनीतिक संतुलन नई दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने भारत से सटे कई अहम सेक्टरों में चीन निर्मित SH-15 व्हील्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर की तैनाती बढ़ाई है। हालांकि सीमा पर इनकी वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के पास इस प्रणाली की करीब 12 से 13 रेजिमेंट मौजूद हैं। इन आधुनिक तोपों को रणनीतिक जरूरतों के अनुसार अलग-अलग सैन्य क्षेत्रों में तैनात किया गया है।
सिर्फ भारत ही नहीं, दूसरे मोर्चों पर भी इस्तेमाल
रिपोर्टों के मुताबिक SH-15 सिस्टम केवल भारत से लगी सीमा तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान ने इसकी कुछ यूनिट बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे संवेदनशील इलाकों में भी तैनात की हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह हथियार पाकिस्तान की व्यापक रक्षा रणनीति का हिस्सा बन चुका है और विभिन्न मोर्चों पर तेजी से तैनात किए जाने योग्य मोबाइल आर्टिलरी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
236 तोपों का सौदा, 2022 से शुरू हुई आपूर्ति
पाकिस्तान ने चीन के साथ SH-15 आर्टिलरी सिस्टम की 236 यूनिट खरीदने का समझौता किया था। इनकी डिलीवरी वर्ष 2022 से शुरू हुई और धीरे-धीरे इन्हें सेना की विभिन्न इकाइयों में शामिल किया गया। ट्रक आधारित यह 155 मिमी/52 कैलिबर हॉवित्जर कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचकर फायरिंग पोजिशन लेने की क्षमता रखता है, जिससे युद्धक्षेत्र में इसकी उपयोगिता काफी बढ़ जाती है।
50 किलोमीटर से अधिक दूरी तक कर सकती है हमला
SH-15 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबी दूरी तक सटीक फायरिंग करने की क्षमता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार रॉकेट-असिस्टेड गोला-बारूद के साथ यह सिस्टम 50 किलोमीटर से भी अधिक दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। इसका मतलब यह है कि अग्रिम मोर्चे से काफी पीछे रहकर भी यह दुश्मन की सैन्य गतिविधियों पर प्रभावी हमला करने में सक्षम है। पाकिस्तान ने इस परियोजना में तकनीकी सहयोग भी हासिल किया है और देश के भीतर इसके उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
भारत भी लगातार बढ़ा रहा अपनी ताकत
पाकिस्तान की बढ़ती आर्टिलरी क्षमता के समानांतर भारत भी अपने तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। भारतीय सेना पहले ही ATAGS, K9 Vajra, Dhanush और M777 जैसे अत्याधुनिक आर्टिलरी सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है। इसके अलावा स्वदेशी Mounted Gun System (MGS) परियोजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में सेना की मारक क्षमता और गतिशीलता दोनों मजबूत होंगी।
सीमा पर बदल रहा सैन्य संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम आज किसी भी सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पाकिस्तान जहां चीन की मदद से अपनी लंबी दूरी की फायरिंग क्षमता को मजबूत करने में जुटा है, वहीं भारत स्वदेशी तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियों के जरिए संतुलित एवं प्रभावी जवाबी क्षमता विकसित कर रहा है। ऐसे में आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान सीमा पर आर्टिलरी शक्ति दोनों देशों की सैन्य रणनीति और सुरक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण आधार बनी रहेगी।



