लाल कपड़े और नारियल से बच्चों को डराना पड़ा भारी, सरकारी स्कूल की शिक्षिका निलंबित
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में सरकारी स्कूल की एक शिक्षिका पर छात्रों को अंधविश्वास के जरिए डराने का आरोप लगा। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई करते हुए शिक्षिका को निलंबित कर दिया।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका पर आरोप है कि उसने अपनी खोई हुई सोने की बाली का पता लगाने के लिए छात्रों को अंधविश्वास का सहारा लेकर डराया। घटना की शिकायत अभिभावकों तक पहुंची तो शिक्षा विभाग ने जांच कराई और आरोपों को गंभीर मानते हुए संबंधित शिक्षिका को निलंबित कर दिया।
खोई हुई बाली की तलाश में अपनाया अंधविश्वास का सहारा
जानकारी के अनुसार, बलौदा विकासखंड के एक शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका की सोने की एक बाली स्कूल परिसर में कहीं गुम हो गई थी। काफी तलाश के बावजूद जब वह नहीं मिली तो उन्होंने सामान्य तरीके से खोज जारी रखने की बजाय धार्मिक प्रतीकों और अंधविश्वास का सहारा लेने का रास्ता चुना।
बताया गया कि कुछ दिनों बाद शिक्षिका लाल रंग के कपड़े में नारियल, चावल और मौली बांधकर विद्यालय पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने कक्षा में मौजूद बच्चों से बाली के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।
छात्रों को बीमारी आने की चेतावनी देने का आरोप
आरोप है कि शिक्षिका ने बच्चों से कहा कि यदि किसी को बाली के बारे में जानकारी है और वह सच नहीं बताएगा, तो उसे उल्टी, दस्त या अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इस कथित चेतावनी से कई बच्चे घबरा गए और स्कूल से घर लौटकर पूरी घटना अपने माता-पिता को बताई।
अभिभावकों ने इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि स्कूल शिक्षा का केंद्र होता है, जहां वैज्ञानिक सोच विकसित की जानी चाहिए, न कि बच्चों के मन में डर और अंधविश्वास पैदा किया जाए।
शिकायत पहुंचते ही शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उनसे पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नोटिस के जवाब में शिक्षिका ऐसा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे उनका पक्ष स्वीकार किया जा सके। इसके बाद प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया।
जिला शिक्षा अधिकारी ने किया निलंबित
जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को शिक्षा व्यवस्था की गरिमा से जुड़ा बताते हुए संबंधित शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उन्हें आगे की विभागीय प्रक्रिया पूरी होने तक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों के बीच किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, डर या भ्रामक मान्यताओं को बढ़ावा देना स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि कोई शिक्षक इस तरह का व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वैज्ञानिक सोच विकसित करना ही शिक्षा का उद्देश्य
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय बच्चों में तर्क, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम होते हैं। ऐसे में यदि शिक्षक ही अंधविश्वास या भय का सहारा लें, तो इसका बच्चों के मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि किसी विद्यालय में इस प्रकार की शिकायत सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने शिक्षकों से भी अपील की है कि वे विद्यार्थियों के सामने केवल वैज्ञानिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करें, ताकि स्कूलों का शैक्षणिक वातावरण स्वस्थ और विश्वासपूर्ण बना रहे।



