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अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI, जांच में सहयोग नहीं मिलने पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से जुड़े कथित सार्वजनिक निर्माण कार्यों के आवंटन मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जांच के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इस पर सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के दो वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से जवाब तलब करते हुए मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने यह कदम उस स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर उठाया, जिसमें CBI ने दावा किया कि जांच के लिए जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। अदालत का मानना है कि न्यायिक आदेशों का पालन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में बाधा का आरोप

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच आगे बढ़ाने के लिए जिन सरकारी अभिलेखों की आवश्यकता है, उन्हें प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एजेंसी के मुताबिक कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा है कि आखिर जांच में सहयोग क्यों नहीं किया जा रहा।

अप्रैल के आदेश के बाद चल रही जांच

सर्वोच्च अदालत ने इसी वर्ष अप्रैल में एक आदेश जारी करते हुए सीबीआई को मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनसे जुड़े लोगों की कंपनियों को सार्वजनिक निर्माण विभाग के ठेके दिए जाने में कथित पक्षपात के आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि शुरुआती जांच के दौरान सभी तथ्यों का निष्पक्ष तरीके से परीक्षण किया जाए और आवश्यक होने पर विस्तृत जांच भी की जाए।

2015 से 2025 तक के ठेकों की हो रही पड़ताल

सीबीआई की जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच राज्य में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए जारी किए गए ठेकों और वर्क ऑर्डर तक सीमित रखा गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच के दौरान इससे पहले या बाद के किसी लेन-देन से जुड़े तथ्य सामने आते हैं तो एजेंसी उन्हें भी जांच के दायरे में शामिल कर सकती है।

दो वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत में होना होगा पेश

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (गृह) को अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से यह भी पूछा है कि न्यायालय के आदेशों के अनुरूप जांच एजेंसी को पूरा सहयोग क्यों नहीं दिया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों को अपना पक्ष विस्तार से रखना होगा।

पहले ही दिए गए थे स्पष्ट निर्देश

अदालत ने अपने पहले के आदेश में राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से कहा था कि सीबीआई की जांच में हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही मुख्य सचिव को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश भी दिया गया था ताकि जांच एजेंसी और राज्य प्रशासन के बीच समन्वय बना रहे। अदालत ने यह भी कहा था कि जांच से जुड़े किसी भी दस्तावेज या रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें नष्ट न होने दिया जाए। अब सीबीआई की ताजा रिपोर्ट के बाद इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की नजर और अधिक सख्त हो गई है।

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