मध्य प्रदेश

स्कूल पहुंचने के लिए बच्चों को लगानी पड़ती थीं 10 छलांगें, वायरल वीडियो के बाद हरकत में आया प्रशासन

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में स्कूली बच्चों के चेक डैम पार कर जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने का वीडियो वायरल हुआ। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर रास्ता बंद किया और सुरक्षित विकल्प तलाशने की प्रक्रिया शुरू की।

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने लाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें स्कूली बच्चे बेतवा नदी पर बने चेक डैम को पार करने के लिए कई खतरनाक छलांगें लगाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि उच्च कक्षाओं में पढ़ने के लिए उन्हें हर दिन इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता था। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी।

आठवीं के बाद स्कूल पहुंचना बन जाता है सबसे बड़ी चुनौती

जानकारी के अनुसार, विदिशा के आसपास स्थित कई गांवों में आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद छात्रों को आगे की शिक्षा के लिए दूसरे गांव स्थित स्कूल जाना पड़ता है।

सड़क मार्ग से स्कूल पहुंचने में काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। समय और संसाधनों की कमी के कारण अनेक छात्र-छात्राएं रोजाना बेतवा नदी के चेक डैम वाला छोटा रास्ता चुनते थे, जो बेहद खतरनाक माना जाता है।

हर दिन चेक डैम पर लगानी पड़ती थीं कई छलांगें

चेक डैम पर बने संकरे हिस्सों के बीच कई फीट का फासला होने के कारण बच्चों को एक-एक कर करीब दस छलांगें लगानी पड़ती थीं। नीचे बहता तेज पानी हर पल किसी बड़े हादसे का खतरा पैदा करता था।

स्थानीय लोगों के अनुसार केवल लड़के ही नहीं, बड़ी संख्या में छात्राएं भी इसी रास्ते से स्कूल जाती थीं। बरसात के मौसम में यह रास्ता और अधिक जोखिम भरा हो जाता था, लेकिन मजबूरी के चलते बच्चों के पास दूसरा आसान विकल्प नहीं था।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। एसडीएम, तहसीलदार और अन्य अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने माना कि बच्चों का इस मार्ग से आना-जाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से चेक डैम के प्रवेश मार्ग को बंद करने का निर्णय लिया गया।

कंटीले तार लगाकर रोका गया आवागमन

संभावित हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने चेक डैम की ओर जाने वाले रास्ते पर कंटीले तार लगवा दिए, ताकि कोई भी छात्र या ग्रामीण इस मार्ग का उपयोग न कर सके।

अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी कीमत पर उन्हें जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही स्थानीय लोगों से भी अपील की गई कि वे इस प्रतिबंध का पालन करें।

अब सुरक्षित रास्ते की तलाश में प्रशासन

एसडीएम ने बताया कि प्रशासन अब विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। उद्देश्य यह है कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उन्हें रोजाना खतरनाक रास्ते से होकर भी न गुजरना पड़े।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षित संपर्क मार्ग विकसित कर दिया जाए तो बच्चों को अपनी शिक्षा के लिए रोज जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन स्थायी समाधान कितनी जल्दी उपलब्ध करा पाता है।

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