मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूल में छात्र पर गिरा छत का प्लास्टर, एक हफ्ते तक छिपाया गया मामला; जांच के आदेश
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के एक सरकारी स्कूल में कक्षा के अंदर छत का प्लास्टर गिरने से 12वीं का एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दो अन्य छात्रों को मामूली चोटें आईं। हैरानी की बात यह रही कि घटना के करीब एक सप्ताह तक इसकी सूचना शिक्षा विभाग को नहीं दी गई। मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने जांच के निर्देश दिए हैं।
यह घटना उमरिया जिले के अखड़ार गांव स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल की बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 24 जुलाई को छात्र लवकुश गुप्ता बाथरूम से लौटकर कक्षा में प्रवेश कर रहा था, तभी छत का बड़ा हिस्सा टूटकर उसके ऊपर गिर गया। हादसे में उसके सिर, कंधे और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आईं। वहीं, दो अन्य छात्रों को भी हल्की चोट लगी।
एक हफ्ते तक विभाग को नहीं दी गई जानकारी
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने घायल छात्र का इलाज तो कराया, लेकिन इसकी जानकारी जिला शिक्षा विभाग या प्रशासन को नहीं दी। बताया जा रहा है कि प्रभारी प्राचार्य खुद छात्र को अस्पताल लेकर गए और इलाज का खर्च उठाने का भरोसा भी दिया। इसी वजह से मामला कई दिनों तक सार्वजनिक नहीं हो सका और विभाग भी इससे अनजान रहा।
DEO ने कहा- सूचना छिपाना गंभीर चूक
जिला शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह बरकड़े ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के जरिए मिली। उन्होंने बताया कि प्राचार्य से बातचीत के बाद घटना की पुष्टि हुई है। उनके अनुसार, इस तरह की घटना होने पर तत्काल विभाग को सूचना देना अनिवार्य था। उन्होंने घायल छात्र के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं और पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
पांच साल पुराने भवन की गुणवत्ता पर उठे सवाल
घटना के बाद जिस कक्षा में हादसा हुआ था, उसे खाली कर दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि छत का करीब पांच फीट हिस्सा टूटकर नीचे गिरा था और मलबा काफी समय तक वहीं पड़ा रहा। स्कूल भवन का निर्माण लगभग पांच वर्ष पहले हुआ था। ऐसे में भवन निर्माण की गुणवत्ता और कार्य में संभावित लापरवाही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
निर्माण एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भवन निर्माण में यदि किसी तरह की लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ होता तो इतनी कम अवधि में छत का प्लास्टर नहीं गिरता। लोगों ने छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग भी की है।
स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल भवनों का समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण और मरम्मत होना जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।



