छत्तीसगढ़

भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, विधायकी चुनौती मामले में याचिका पर नहीं मिली राहत

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि बघेल चुनाव न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी सभी दलीलें रख सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी विधायकी को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज किए जाने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चुनाव न्यायाधिकरण में जारी रहेगी और भूपेश बघेल वहां अपने सभी कानूनी तर्क रखने के लिए स्वतंत्र होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए भूपेश बघेल की याचिका का निस्तारण कर दिया।

अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट की कार्यवाही रोकने का कोई आधार नहीं बनता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि भूपेश बघेल चुनाव न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी सभी दलीलें और कानूनी आपत्तियां पूरी तरह रख सकते हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। पाटन विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद भूपेश बघेल की जीत को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

उनके खिलाफ चुनाव याचिका भाजपा उम्मीदवार विजय बघेल ने दायर की थी, जो रिश्ते में उनके भतीजे भी हैं। याचिका में चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता और चुनाव नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

याचिका खारिज करने की मांग नहीं मानी गई

भूपेश बघेल ने हाईकोर्ट में दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि याचिका कानूनी रूप से विचार योग्य नहीं है और उसमें आवश्यक कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए भूपेश बघेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी।

कपिल सिब्बल ने रखा पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि चुनाव याचिका में ऐसे तथ्य नहीं हैं जिनके आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाई जाए।

अदालत ने हालांकि इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि सभी कानूनी मुद्दों पर चुनाव न्यायाधिकरण के समक्ष विस्तार से सुनवाई की जा सकती है।

आरोप किस बात का है?

चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान से 48 घंटे पहले लागू ‘साइलेंस पीरियड’ में भूपेश बघेल ने रोड शो किया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 का उल्लंघन है। इसी आधार पर उनकी चुनावी जीत को चुनौती दी गई है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है और मामले की सुनवाई संबंधित न्यायिक मंच पर जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चुनाव न्यायाधिकरण में आगे बढ़ेगा। भूपेश बघेल वहां अपने बचाव में सभी कानूनी तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत कर सकेंगे, जबकि याचिकाकर्ता भी अपने आरोपों को साबित करने की कोशिश करेगा। अब इस बहुचर्चित चुनावी विवाद की अगली दिशा हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और उसके अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

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