एक्शन मोड में CM मोहन यादव, जनसुनवाई के दौरान CMHO समेत 3 अधिकारियों को किया सस्पेंड
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की शुरुआत की। जनसुनवाई के दौरान लापरवाही मिलने पर CMHO, तहसीलदार और पटवारी को तत्काल निलंबित कर सख्त संदेश दिया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को छिंदवाड़ा दौरे के दौरान पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने यहां ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ का शुभारंभ किया और जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इसी दौरान शिकायतों में लापरवाही सामने आने पर मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेश गुन्नाड़े, एक तहसीलदार और एक पटवारी को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि जनता के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी अधिकारी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छिंदवाड़ा से शुरू हुआ जन-विश्वास अभियान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। इस अभियान के तहत मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और विकास से जुड़े सुझाव भी प्राप्त करेंगे।
उन्होंने कहा कि जनसंवाद के जरिए मिलने वाले सुझावों को भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीतियों में शामिल किया जाएगा, ताकि विकास योजनाएं स्थानीय जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।
जनसुनवाई के दौरान तीन अधिकारियों पर गिरी गाज
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा की। शिकायतों में लापरवाही और अनियमितता सामने आने पर उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए CMHO डॉ. नरेश गुन्नाड़े, एक तहसीलदार और एक पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई को प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी।
लोक सेवा केंद्र का भी किया निरीक्षण
जनसंवाद कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय स्थित लोक सेवा केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध सुविधाओं और नागरिक सेवाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
इसके बाद उन्होंने उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक कर जिले के विकास, औद्योगिक निवेश, रोजगार और अन्य विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
हर शुक्रवार होगा ‘नो मीटिंग डे’
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब मध्य प्रदेश में प्रत्येक शुक्रवार ‘नो मीटिंग डे’ रहेगा। इस दिन मंत्री, विधायक, कलेक्टर, कमिश्नर और अन्य अधिकारी कार्यालयों में बैठकों के बजाय सीधे जनता के बीच मौजूद रहेंगे।
उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय से लेकर तहसील स्तर तक नियमित जनता दरबार लगाए जाएंगे, जहां लोगों की शिकायतें सुनकर मौके पर समाधान का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के चार प्रमुख आधार संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी होंगे।
प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास की नई रणनीति पर काम कर रही है। प्राकृतिक खेती, पशुपालन, ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे जैसी योजनाओं को बढ़ावा देकर गांवों में रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जन-विश्वास अभियान के दौरान लोगों से मिलने वाले सुझावों को विकास योजनाओं का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच सके।
अब आगे क्या?
राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान पूरे मध्य प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। हर शुक्रवार जनता दरबार के माध्यम से लोगों की शिकायतों का समाधान किया जाएगा और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से लागू कर जनता का विश्वास और मजबूत करना है।



