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Gen-Z को साधने की नई सियासी जंग! PM मोदी का GRWM, राहुल गांधी का AMA और बदलती राजनीति

देश की राजनीति में Gen-Z युवाओं को जोड़ने की होड़ तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अलग-अलग डिजिटल और संवादात्मक तरीकों से नई पीढ़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत की राजनीति में अब युवा मतदाता सबसे बड़ा केंद्र बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि प्रमुख राजनीतिक चेहरे अब पारंपरिक प्रचार के साथ-साथ सोशल मीडिया की नई भाषा और डिजिटल ट्रेंड को भी अपना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत हाल के दिनों में अलग-अलग मंचों के जरिए Gen-Z युवाओं तक पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दिए। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में डिजिटल संवाद चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनने वाला है।

GRWM ट्रेंड के जरिए युवाओं से जुड़े प्रधानमंत्री मोदी

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर युवाओं से अलग अंदाज में संवाद किया। उन्होंने लोगों से पारंपरिक हथकरघा परिधान पहनकर GRWM (Get Ready With Me) शैली में वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की।

GRWM सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय वीडियो फॉर्मेट माना जाता है, जिसमें लोग तैयार होने की पूरी प्रक्रिया को वीडियो के जरिए साझा करते हैं। इस ट्रेंड का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री ने युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की।

राहुल गांधी का डिजिटल संवाद

दूसरी ओर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर AMA (Ask Me Anything) सेशन शुरू किया है। इस माध्यम से वह युवाओं और छात्रों के सवालों का सीधे जवाब दे रहे हैं।

राहुल गांधी लगातार छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। उनके डिजिटल संवाद का उद्देश्य युवाओं के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना और उनकी चिंताओं को सुनना बताया जा रहा है।

छात्रों के बीच बढ़ा राजनीतिक संवाद

राहुल गांधी देश के विभिन्न शहरों में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रमों में भी हिस्सा ले रहे हैं। इन कार्यक्रमों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी, बेरोजगारी, शिक्षा की बढ़ती लागत और युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

कांग्रेस का कहना है कि यह अभियान युवाओं की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का प्रयास है और आने वाले समय में इसे देश के अन्य हिस्सों तक भी विस्तार दिया जाएगा।

RSS भी नई पीढ़ी से जुड़ने की कोशिश में

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी हाल ही में युवाओं के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने नई पीढ़ी के सवालों का जवाब दिया और बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत है कि अब विभिन्न वैचारिक संगठन भी युवाओं तक पहुंचने के लिए संवाद आधारित मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सोशल मीडिया बना नई राजनीतिक रणनीति का केंद्र

राजनीतिक दलों की रणनीति अब तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही है। छोटे वीडियो, लाइव सेशन, रील्स, पॉडकास्ट और इंटरैक्टिव कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंचने का प्रयास लगातार बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि Gen-Z पारंपरिक भाषणों की तुलना में ऐसे कंटेंट को अधिक पसंद करती है, जहां उन्हें सीधे जुड़ने और अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।

अब आगे क्या?

आने वाले चुनावों में Gen-Z मतदाता सबसे प्रभावशाली वर्गों में शामिल होंगे। यही वजह है कि राजनीतिक दल उनकी पसंद, भाषा और डिजिटल व्यवहार को समझते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर सक्रियता और नए ट्रेंड अपनाना एक पहलू है, लेकिन युवाओं का अंतिम फैसला रोजगार, शिक्षा, अवसर और उनके जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ही निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई पीढ़ी किस राजनीतिक संदेश और नेतृत्व पर सबसे अधिक भरोसा जताती है।

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