Tragedy: खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से 3 साल के मासूम की मौत
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए परिवार के साथ पहुंचे महाराष्ट्र के एक श्रद्धालु के तीन वर्षीय बेटे की खुले पड़े सेप्टिक टैंक में गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद प्रशासन ने नगर परिषद के एक सब इंजीनियर को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के नागपुर निवासी कैलाश उसराठे अपने परिवार के साथ 24 जुलाई की सुबह भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने पहुंचे थे। उनकी बस ब्रह्मपुरी पार्किंग पर रुकी। इसी दौरान उनका तीन वर्षीय बेटा तनुष गाड़ी से उतरकर आगे की ओर दौड़ पड़ा। अंधेरा होने के कारण किसी को पास में मौजूद खुले और गहरे सेप्टिक टैंक का अंदाजा नहीं हुआ और मासूम उसमें गिर गया।
पिता ने खुद टैंक में उतरकर निकाला बेटा
परिजनों के अनुसार बेटे के टैंक में गिरते ही पिता कैलाश उसराठे बिना देर किए खुद सेप्टिक टैंक में उतर गए और काफी मशक्कत के बाद बच्चे को बाहर निकाला। हालांकि तब तक उसके फेफड़ों में दूषित पानी भर चुका था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
खुले सेप्टिक टैंक को लेकर सामने आई बड़ी लापरवाही
अधिकारियों के मुताबिक जिस सेप्टिक टैंक में बच्चा गिरा, वह एक धर्मशाला का था। बताया गया कि नगर परिषद ने हाल ही में धर्मशाला के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की थी, लेकिन उसके बाद सेप्टिक टैंक को खुला छोड़ दिया गया। सुरक्षा के लिए न तो उसे ढका गया और न ही वहां किसी प्रकार की बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाए गए। इसी लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।
सब इंजीनियर पर गिरी कार्रवाई की गाज
घटना के बाद नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। विभाग ने नगर परिषद ओंकारेश्वर के सब इंजीनियर सुरेशचंद्र पाटीदार को कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह हादसा तीर्थस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। हर साल लाखों श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं, लेकिन यदि खुले गड्ढे, सेप्टिक टैंक या निर्माण स्थलों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा तो ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को ऐसे संवेदनशील स्थानों पर नियमित निरीक्षण, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
एक हादसा, कई सीख
तीन साल के मासूम तनुष की मौत केवल एक परिवार की अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। यदि खुले सेप्टिक टैंक को समय रहते सुरक्षित कर दिया गया होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था। अब यह देखना होगा कि प्रशासन केवल निलंबन तक सीमित रहता है या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और स्थायी कदम भी उठाए जाते हैं।



