डॉलर के मुकाबले रुपये ने पकड़ी रफ्तार, RBI की MPC बैठक से पहले एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंची भारतीय मुद्रा
RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू होने से पहले भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। जानिए रुपये की मजबूती के पीछे कौन-कौन से बड़े कारण हैं।
भारतीय मुद्रा ने सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग एक महीने के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले सकारात्मक माहौल ने रुपये को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई है। इससे वित्तीय बाजारों में भी उत्साह देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में रुपये ने दर्ज की मजबूत बढ़त
विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को भारतीय रुपया मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में स्थानीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले करीब 95.12 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गई, जो पिछले लगभग एक महीने का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है। इससे पहले रुपया लगातार कई कारोबारी सत्रों में भी मजबूती दिखा चुका था।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से रुपये में लगातार सुधार का रुख बना हुआ है। निवेशकों का भरोसा बढ़ने और वैश्विक परिस्थितियों के अनुकूल रहने से भारतीय मुद्रा को अतिरिक्त समर्थन मिला है।
कमजोर डॉलर और सस्ते कच्चे तेल का मिला फायदा
विश्लेषकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की कमजोरी भारतीय रुपये के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत बनी। डॉलर इंडेक्स में गिरावट आने से उभरते देशों की मुद्राओं को मजबूती मिली, जिसका लाभ भारतीय रुपये को भी मिला।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई गिरावट ने भी राहत दी। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चा तेल सस्ता होने से आयात बिल कम होने की उम्मीद बढ़ती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में नरमी को रुपये के लिए सकारात्मक माना जाता है।
विदेशी निवेश और विदेशी मुद्रा भंडार ने बढ़ाया भरोसा
बाजार जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ने से भी रुपये को मजबूती मिली है। विदेशी निवेश आने से डॉलर की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिलता है।
इसके अलावा देश के विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती और भारतीय रिजर्व बैंक की सक्रिय निगरानी ने भी बाजार में विश्वास कायम रखा है। निवेशकों का मानना है कि RBI जरूरत पड़ने पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर अस्थिरता को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है।
RBI की MPC बैठक पर टिकी बाजार की नजर
सोमवार से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक के फैसलों की घोषणा 5 अगस्त को की जाएगी। निवेशकों और उद्योग जगत की नजर ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक के भविष्य के रुख पर टिकी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि RBI आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलित नीति अपनाता है, तो इसका सकारात्मक असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिल सकता है। इसलिए मौद्रिक नीति से जुड़े हर संकेत पर बाजार की करीबी नजर बनी हुई है।
शेयर बाजार में भी दिखा उत्साह, निवेशकों का बढ़ा भरोसा
रुपये की मजबूती के साथ-साथ घरेलू शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। मजबूत वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश के चलते निवेशकों की खरीदारी बढ़ी।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में डॉलर कमजोर बना रहता है, कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो भारतीय रुपये को आगे भी मजबूती मिल सकती है। हालांकि आने वाले दिनों में RBI के फैसले और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



