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LPG-CNG पर लग सकता है नया शुल्क! रणनीतिक ईंधन भंडार की तैयारी में सरकार, गैस बिल बढ़ने की संभावना

केंद्र सरकार रणनीतिक ईंधन भंडार तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्ताव के तहत LPG और प्राकृतिक गैस पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे घरेलू गैस सिलेंडर और CNG उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ सकता है।

देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार एक दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत कच्चे तेल के साथ-साथ एलपीजी और एलएनजी का भी बड़ा रणनीतिक भंडार तैयार किया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें गैस उपभोक्ताओं से मामूली शुल्क लेने का प्रस्ताव भी शामिल है। हालांकि फिलहाल इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और योजना अभी विचाराधीन है।

पहली बार LPG और LNG पर भी रणनीतिक फोकस

अब तक रणनीतिक भंडारण का दायरा मुख्य रूप से कच्चे तेल तक सीमित था, लेकिन नई योजना में एलपीजी और एलएनजी को भी शामिल करने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध, वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियों में देश के पास पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रहे।

घरेलू गैस पर लग सकता है अतिरिक्त शुल्क

प्रस्ताव के अनुसार घरेलू एलपीजी पर प्रति किलोग्राम एक अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार किया जा रहा है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में सीमित बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि एक सामान्य घरेलू सिलेंडर की लागत में लगभग 18 रुपये तक का इजाफा हो सकता है।

हालांकि सरकार की ओर से अभी इस शुल्क को लागू करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

प्राकृतिक गैस उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है असर

प्राकृतिक गैस यानी CNG और पाइप्ड गैस से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए भी एक अलग शुल्क प्रस्तावित है। इससे गैस वितरण व्यवस्था से जुड़े उपभोक्ताओं के मासिक बिल में हल्की वृद्धि हो सकती है। शुरुआती आकलन के मुताबिक कुल प्रभाव लगभग दो प्रतिशत तक रहने की संभावना जताई जा रही है।

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति कई बार भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होती रही है। ऐसे में पर्याप्त रणनीतिक भंडार होने से देश लंबे समय तक आवश्यक ईंधन उपलब्ध करा सकता है और अचानक आने वाले संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।

10 वर्षों में तैयार हो सकती है बड़ी परियोजना

सरकार की प्रस्तावित योजना लंबी अवधि की मानी जा रही है। इसे चरणबद्ध तरीके से लगभग दस वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान नए स्टोरेज टर्मिनल, भंडारण सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

योजना पर भारी निवेश का अनुमान है, जिसका बड़ा हिस्सा स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में खर्च होगा।

अभी अंतिम फैसला बाकी

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव अभी विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श के चरण में है। इसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुल्क कब से लागू होगा, कितना होगा और किन श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

फिलहाल उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं

चूंकि प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं हुआ है, इसलिए वर्तमान में एलपीजी, सीएनजी या पाइप्ड गैस की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उपभोक्ता पहले की तरह ही सेवाओं का उपयोग करते रहेंगे।

यदि भविष्य में इस योजना को मंजूरी मिलती है तो सरकार इसकी विस्तृत रूपरेखा, शुल्क की दरें और लागू होने की प्रक्रिया अलग से घोषित करेगी। फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित योजना है, जिस पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।

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