पहाड़ों की मशहूर चौंसा दाल घर पर बनाएं, लोहे की कढ़ाई में पकाने से आएगा असली स्वाद

उत्तराखंड की चौंसा दाल अपने देसी और मिट्टी से जुड़े स्वाद के लिए काफी पसंद की जाती है। साबुत उड़द दाल को भूनकर तैयार की जाने वाली यह पहाड़ी डिश सामान्य दाल से बिल्कुल अलग स्वाद देती है। जानिए इसे घर पर बनाने का आसान तरीका।
उत्तराखंड का खान-पान अपनी सादगी, पौष्टिकता और खास पहाड़ी स्वाद के लिए जाना जाता है। यहां की पारंपरिक डिशेज में चौंसा दाल भी खास जगह रखती है। इसे चैंसू या पहाड़ी दाल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि साबुत उड़द दाल को पहले सूखा भुना जाता है और फिर दरदरा पीसकर मसालों के साथ पकाया जाता है। इससे दाल में हल्का नटी और मिट्टी जैसा खास स्वाद आता है।
चौंसा दाल बनाने के लिए सामग्री
इसके लिए करीब 1 कप साबुत उड़द दाल, 2 से 3 बड़े चम्मच सरसों का तेल, 1 चम्मच राई या सरसों के दाने, 1 चम्मच जीरा, चुटकी भर हींग, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, साबुत धनिया और स्वादानुसार नमक की जरूरत होगी। स्वाद और रंग के लिए हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ पारंपरिक विधियों में थोड़ा गेहूं का आटा भी डाला जाता है, जिससे दाल की बनावट और स्वाद बेहतर होता है।
सबसे पहले भूनें साबुत उड़द दाल
चौंसा दाल का असली स्वाद दाल को भूनने से आता है। सबसे पहले साबुत उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर अतिरिक्त पानी सुखा लें। अब लोहे की कढ़ाई या भारी तले वाले पैन को गर्म करें और दाल को मध्यम आंच पर सूखा भूनें।
दाल को लगातार चलाते रहें ताकि वह जले नहीं। जब दाल से हल्की खुशबू आने लगे और उसका रंग थोड़ा बदल जाए तो गैस बंद कर दें। दाल को पूरी तरह ठंडा होने दें।
दाल को दरदरा पीसें
ठंडी हुई भुनी दाल को मिक्सर में डालकर दरदरा पीस लें। ध्यान रखें कि दाल का बहुत बारीक पाउडर न बनाएं। इसका हल्का दरदरा टेक्सचर ही चौंसा दाल को खास बनाता है।
तैयार करें पहाड़ी मसाले का पेस्ट
अब अदरक, लहसुन, हरी मिर्च और साबुत धनिया को कूटकर मोटा पेस्ट तैयार करें। पारंपरिक तरीके में मसालों को सिल-बट्टे या ओखली में कूटने से उनका स्वाद और खुशबू ज्यादा अच्छी तरह निकलती है।
लोहे की कढ़ाई में लगाएं तड़का
अब लोहे की कढ़ाई में सरसों का तेल डालकर गर्म करें। तेल गर्म होने पर राई और जीरा डालें। इसके बाद हींग और तैयार मसाले का पेस्ट डालकर अच्छी तरह भूनें।
जब मसाले की कच्ची खुशबू खत्म होने लगे तो इसमें थोड़ा गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर भूनें। आटे की कच्ची महक खत्म होने के बाद इसमें दरदरी पिसी हुई उड़द दाल डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं।
अब डालें गर्म पानी
दाल में धीरे-धीरे गर्म पानी डालते जाएं और साथ-साथ चलाते रहें, ताकि गांठ न बने। इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक डालें।
दाल को धीमी आंच पर पकने दें। पारंपरिक तरीकों में इसे धीरे-धीरे पकाने से दाल का स्वाद और खुशबू अच्छी तरह विकसित होती है। जरूरत के अनुसार पानी डालकर इसकी कंसिस्टेंसी अपनी पसंद के मुताबिक रख सकते हैं।
हरे धनिये से करें गार्निश
दाल अच्छी तरह पक जाए और गाढ़ी हो जाए तो ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालें। गरमा-गरम चौंसा दाल को चावल, रोटी या पहाड़ी अंदाज में मंडुवे की रोटी के साथ परोसा जा सकता है।
चौंसा दाल को क्यों माना जाता है खास?
चौंसा दाल की खासियत इसकी बनाने की प्रक्रिया है। सामान्य दाल की तरह इसे सीधे उबालने के बजाय पहले साबुत उड़द को भुना और दरदरा पीसा जाता है। इसके बाद सरसों के तेल और कुटे हुए मसालों के साथ पकाने से इसमें अलग तरह की खुशबू और गहरा स्वाद आता है। यही वजह है कि उत्तराखंड की यह पारंपरिक डिश पहाड़ी खान-पान की पहचान मानी जाती है।



