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कब्ज से परेशान हैं? ये योगासन दिला सकते हैं राहत, ऐसे करें अभ्यास

लंबे समय तक बैठे रहना, कम पानी पीना, फाइबर की कमी और खराब खान-पान कब्ज की समस्या को बढ़ा सकते हैं। नियमित योग और बेहतर लाइफस्टाइल से पाचन तंत्र को सपोर्ट किया जा सकता है।

 

कब्ज यानी Constipation आजकल एक आम समस्या बन गई है। अनियमित खान-पान, कम पानी पीना, शारीरिक गतिविधि की कमी और घंटों एक ही जगह बैठे रहने से कई लोगों को पेट साफ न होने, मल त्याग में परेशानी और पेट फूलने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

योग गुरु बाबा रामदेव ने कब्ज और गैस जैसी पाचन संबंधी परेशानियों में कुछ योगासनों को उपयोगी बताया है। इनमें पवनमुक्तासन, उत्तानपादासन, नौकासन, सेतुबंधासन और मलासन जैसे आसन शामिल हैं। नियमित योग शरीर की गतिविधि बढ़ाने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है, जो पाचन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

  1. पवनमुक्तासन

कब्ज और गैस की समस्या में पवनमुक्तासन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस आसन में घुटनों को पेट की ओर लाकर शरीर को एक विशेष स्थिति में रखा जाता है। इससे पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है।

कैसे करें:
पीठ के बल लेट जाएं और दोनों पैरों को सीधा रखें। अब घुटनों को मोड़कर छाती की तरफ लाएं और हाथों से पैरों को पकड़ें। अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय इसी स्थिति में रहें और फिर सामान्य अवस्था में लौट आएं।

  1. उत्तानपादासन

उत्तानपादासन पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाला योगासन है। इसे करते समय पेट के हिस्से पर खिंचाव महसूस होता है और शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं।

शुरुआत करने वालों को इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए। यदि कमर में दर्द या दूसरी परेशानी हो तो योग विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

  1. नौकासन

नौकासन में शरीर का आकार नाव जैसा बनता है। यह पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने और शरीर की कोर मसल्स को सक्रिय करने में मदद कर सकता है।

इस आसन को करते समय शरीर को संतुलित रखना जरूरी है। शुरुआत में थोड़े समय के लिए अभ्यास करें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।

  1. सेतुबंधासन

सेतुबंधासन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर उठाया जाता है। यह शरीर के निचले हिस्से और पेट के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।

योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन पाचन संबंधी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

  1. मलासन

मलासन को स्क्वाट जैसी स्थिति में किया जाता है। यह शरीर की ऐसी मुद्रा है जिसमें पेट और पेल्विक क्षेत्र पर प्रभाव पड़ता है। कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे मल त्याग की प्राकृतिक मुद्रा के करीब मानते हैं।

हालांकि घुटनों, कूल्हों या कमर में परेशानी वाले लोगों को इसे सावधानी से करना चाहिए।

योग के साथ इन बातों का भी रखें ध्यान

सिर्फ योग करने से ही कब्ज की समस्या हमेशा दूर हो, यह जरूरी नहीं है। पर्याप्त पानी पीना, फाइबर युक्त भोजन लेना, नियमित पैदल चलना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य स्रोतों के अनुसार, पर्याप्त पानी और फाइबर कब्ज को मैनेज करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सुबह उठने के बाद नियमित दिनचर्या बनाना, फल-सब्जियों को आहार में शामिल करना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना भी मददगार हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर कब्ज बार-बार हो रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या इसके साथ तेज पेट दर्द, उल्टी, पेट बहुत ज्यादा फूलना, मल में खून या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो केवल योग या घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी बीमारी के इलाज या दवा के विकल्प के रूप में इसे न लें। योगासन अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करें और किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ की सलाह लें।

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