हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से राहत नहीं, ED मनी लॉन्ड्रिंग केस में आगे बढ़ेगी कार्रवाई

हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से झटका! ED मनी लॉन्ड्रिंग केस में कार्रवाई पर रोक से इनकार, ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ेगी सुनवाई
दिल्ली | दीपक झा
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी मंजूरी नहीं होने के आधार पर फिलहाल पूरे मामले की सुनवाई या ट्रायल को रोका नहीं जा सकता।
ED मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत की मांग खारिज
झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ECIR केस नंबर 6/2023 में आगे की कार्रवाई रोकने की मांग की थी। इस याचिका पर सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में हुई।
हेमंत सोरेन की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले जरूरी सरकारी अनुमति नहीं ली गई थी। उनके वकीलों ने पुराने कानून यानी CRPC की धारा 197 का हवाला देते हुए कहा कि बिना मंजूरी के आगे की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
ED ने क्या दलील दी?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हेमंत सोरेन की याचिका का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से कहा गया कि इस मामले में मौजूदा कानून के तहत BNS की धारा 218 लागू होगी।
ED का तर्क था कि तय समय सीमा के भीतर फैसला नहीं होने पर मंजूरी को स्वीकृत माना जा सकता है।
कोर्ट ने क्यों नहीं दी राहत?
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर सिर्फ सरकारी मंजूरी के मुद्दे को आधार बनाकर पूरी कानूनी प्रक्रिया रोकना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी कहा कि अभी यह तय करना जल्दबाजी होगी कि हेमंत सोरेन के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कामकाज का हिस्सा थे या नहीं। कोर्ट के मुताबिक, इस सवाल का फैसला ट्रायल के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर किया जाएगा।
19 सितंबर को तय हो सकते हैं आरोप
हेमंत सोरेन की ओर से अदालत को बताया गया था कि ED मामले में 19 सितंबर 2026 को आरोप तय करने की तारीख निर्धारित है। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट से तत्काल राहत की मांग की थी, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया पर रोक लगाई जा सके।
हालांकि, हाईकोर्ट ने कार्रवाई रोकने से इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को दी स्वतंत्रता
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल कार्रवाई रोकने की मांग वाली याचिका तक सीमित हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत यानी विशेष PMLA कोर्ट इस मामले की सुनवाई कानून के अनुसार आगे बढ़ाएगी। साथ ही, हाईकोर्ट की टिप्पणियों से ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित नहीं होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला रांची स्थित विशेष PMLA अदालत में चल रहा है, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए हैं।
हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को विशेष अदालत ने 8 जून 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
अब हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।



