उत्तराखंड

कांवड़ यात्रा के बीच बड़ा अलर्ट! जिस रास्ते से गुजरेंगे श्रद्धालु, वहीं तेंदुए की दहशत, प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

हरिद्वार-मुरादाबाद कांवड़ मार्ग पर तेंदुए की बढ़ती गतिविधियों के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हाई अलर्ट, सीसीटीवी, पुलिस पिकेट, रोशनी और विशेष एडवाइजरी जारी की गई है।

हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ यात्रियों के लिए इस बार धार्मिक यात्रा के साथ सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। हरिद्वार-मुरादाबाद मार्ग पर तेंदुए की लगातार बढ़ती गतिविधियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में एक महिला पर हुए जानलेवा हमले के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट लागू कर दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, वन विभाग और जिला प्रशासन ने कई अतिरिक्त इंतजाम किए हैं।

महिला पर हमले के बाद बढ़ी सतर्कता

हालिया घटना के बाद प्रशासन ने पूरे संवेदनशील इलाके का सुरक्षा आकलन किया। अधिकारियों का मानना है कि जिस क्षेत्र से बड़ी संख्या में कांवड़िए गुजरते हैं, वहां जंगली जानवरों की गतिविधियां भी बढ़ी हुई हैं। इसी वजह से पूरे मार्ग पर अतिरिक्त निगरानी शुरू कर दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

प्रशासन ने कांवड़ मार्ग के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा इंतजाम पहले से अधिक सख्त कर दिए हैं। कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, पुलिस पिकेट तैनात किए गए हैं और चेतावनी बोर्ड स्थापित किए गए हैं ताकि यात्रियों को संभावित खतरे की जानकारी मिलती रहे।

रात के समय दृश्यता बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था भी की गई है, जिससे अंधेरे वाले हिस्सों में जोखिम कम किया जा सके।

श्रद्धालुओं के लिए जारी हुई विशेष सलाह

पुलिस ने कांवड़ यात्रियों से अपील की है कि वे सुनसान इलाकों से बचें और अकेले यात्रा करने की बजाय समूह में आगे बढ़ें। विशेष रूप से जंगलों, गन्ने के खेतों और झाड़ियों के पास अनावश्यक रूप से रुकने से बचने की सलाह दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि समूह में यात्रा करने से वन्यजीव आमतौर पर दूरी बनाए रखते हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

क्यों संवेदनशील माना जा रहा है यह इलाका?

यह मार्ग कई ग्रामीण क्षेत्रों और घनी कृषि भूमि से होकर गुजरता है। लंबे गन्ने के खेत और झाड़ियां तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाने का काम करती हैं। पिछले वर्षों में भी इस इलाके में कई बार तेंदुए के दिखाई देने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

वन विभाग लगातार ऐसे स्थानों की निगरानी कर रहा है, जहां जंगली जानवरों की मौजूदगी की आशंका अधिक रहती है।

लाउडस्पीकर से भी किया जा रहा जागरूक

यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रखने के लिए कई जगहों पर लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणाएं कराई जा रही हैं। लोगों को बताया जा रहा है कि यदि कहीं तेंदुआ दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे भगाने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत पुलिस या वन विभाग को सूचना दें।

पुलिस और वन विभाग की संयुक्त निगरानी

पूरे मार्ग पर पुलिस और वन विभाग की टीमें मिलकर गश्त कर रही हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ वन्यजीवों की आवाजाही पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर हर समय नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

यात्रा के दौरान बरतें अतिरिक्त सावधानी

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करें और किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें। यदि रास्ते में किसी वन्यजीव की सूचना मिले तो प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और भीड़ इकट्ठा करने से बचें।

अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा इंतजामों का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भयभीत करना नहीं, बल्कि संभावित जोखिम को कम करना है ताकि कांवड़ यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

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