उत्तराखंड

हरिद्वार में जंगली हाथी ने शख्स को पटककर मार डाला, लेकिन क्यों नहीं मिलेगा 4 लाख का मुआवजा? जानें पूरा मामला

उत्तराखंड के हरिद्वार की श्यामपुर रेंज में जंगली हाथी के हमले में एक वन गुर्जर की मौत हो गई। हादसे के बाद वन विभाग ने शव का पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन परिजनों ने धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया। अब यही फैसला सरकारी मुआवजे की राह में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना हरिद्वार की श्यामपुर रेंज के जंगल क्षेत्र में हुई, जहां जंगली हाथियों की आवाजाही अक्सर बनी रहती है। बताया जा रहा है कि जंगल में मौजूद एक हाथी ने वन गुर्जर पर हमला कर दिया और उसे पटककर गंभीर रूप से घायल कर दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची और जांच शुरू की।

हादसे के बाद बढ़ाई गई निगरानी

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिस क्षेत्र में यह घटना हुई, वहां पहले भी हाथियों की गतिविधियां दर्ज की जा चुकी हैं। घटना के बाद इलाके में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग ने आसपास रहने वाले लोगों से भी जंगल में जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

पोस्टमार्टम से इनकार, इसलिए अटका मुआवजा

वन विभाग के अनुसार, वन्यजीव के हमले में मौत होने पर सरकारी आर्थिक सहायता देने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य दस्तावेज होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह पुष्टि होती है कि मौत वास्तव में वन्यजीव के हमले से हुई है।

लेकिन मृतक के परिजनों ने धार्मिक परंपराओं का हवाला देते हुए पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद विभाग ने नियमानुसार शव परिजनों को सौंप दिया, लेकिन पोस्टमार्टम न होने के कारण मुआवजे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

वन विभाग ने क्या कहा?

श्यामपुर रेंज अधिकारी विवेक जोशी ने बताया कि विभाग नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहा था। उन्होंने कहा कि वन्यजीव हमले में मुआवजा देने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट जरूरी होती है। चूंकि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया, इसलिए विभाग निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई नहीं कर सका।

वन्यजीव हमले में कितना मिलता है मुआवजा?

उत्तराखंड सरकार के प्रावधानों के अनुसार, वन्यजीव के हमले में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए वन विभाग की जांच, आवश्यक दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित पूरी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।

कौन होते हैं वन गुर्जर?

वन गुर्जर उत्तराखंड, हिमालयी और तराई क्षेत्रों में रहने वाला पारंपरिक पशुपालक समुदाय है। यह समुदाय मुख्य रूप से भैंस पालन पर निर्भर रहता है और पीढ़ियों से जंगलों के आसपास रहकर अपनी आजीविका चलाता आया है। मौसम के अनुसार ये अपने पशुओं के साथ ऊंचाई वाले और मैदानी क्षेत्रों के बीच पलायन भी करते हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मृतक का परिवार इस्लाम धर्म की मान्यताओं का पालन करता है और धार्मिक कारणों से पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया।

धार्मिक मान्यता बनाम सरकारी नियम

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब धार्मिक मान्यताएं और सरकारी नियम आमने-सामने आ जाएं तो पीड़ित परिवारों की मदद कैसे सुनिश्चित की जाए। फिलहाल वन विभाग का कहना है कि वह नियमों के तहत ही कार्रवाई कर सकता है, जबकि स्थानीय लोगों ने हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर चिंता जताते हुए जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय और मजबूत करने की मांग की है।

Related Articles

Back to top button