ट्रंप का बड़ा दावा: दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य अभियान की तैयारी थी, ईरान ने बदला रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी में था, लेकिन बातचीत की पहल के बाद हालात बदल गए। परमाणु कार्यक्रम पर भी उन्होंने अपना सख्त रुख दोहराया।
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका एक बेहद बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था, लेकिन अंतिम समय में ईरान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने के बाद परिस्थितियां बदल गईं। ट्रंप ने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा।
सैन्य तैयारी को लेकर किया बड़ा दावा
एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और सैन्य तंत्र संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थे। उनके अनुसार यदि कूटनीतिक रास्ता नहीं खुलता तो स्थिति व्यापक सैन्य टकराव तक पहुंच सकती थी। उन्होंने इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद संभावित सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक बताया।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्तावित कार्रवाई का स्वरूप क्या होता या किन सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा था।
बातचीत की पहल से बदले हालात
ट्रंप के अनुसार तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान की ओर से संवाद की संभावना सामने आई, जिसके बाद सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि बातचीत किसी भी संघर्ष से बेहतर विकल्प होती है, लेकिन यह तभी संभव है जब दूसरी ओर गंभीरता दिखाई जाए।
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और सहयोगी देशों के हितों से समझौता किए बिना बातचीत के लिए तैयार रह सकता है।
परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया सख्त रुख
अपने संबोधन में ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनके अनुसार यदि ऐसा होता है तो पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर अपनी नीति में किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगा।
मध्य पूर्व में बढ़ सकती है कूटनीतिक सक्रियता
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और दबाव की रणनीति समानांतर रूप से आगे बढ़ सकती है। एक ओर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर प्रत्यक्ष टकराव से बचने की कोशिश भी जारी रह सकती है।
हालांकि दोनों देशों की आधिकारिक नीतियां कई अहम मुद्दों पर अब भी अलग-अलग बनी हुई हैं।
वैश्विक बाजार भी रखते हैं नजर
अमेरिका और ईरान के रिश्तों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव केवल राजनीतिक घटनाक्रम नहीं माना जाता। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से दुनिया भर के देश इन घटनाओं पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।
अभी नहीं बदली आधिकारिक स्थिति
ट्रंप के बयान के बावजूद फिलहाल किसी नए सैन्य अभियान या नई कूटनीतिक घोषणा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी विस्तृत रणनीति सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए मौजूदा स्थिति को बयानबाजी और कूटनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्रीय तनाव कम होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि परमाणु कार्यक्रम या सुरक्षा संबंधी मतभेद गहराते हैं तो दोनों देशों के बीच टकराव का जोखिम फिर बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में वॉशिंगटन और तेहरान किस दिशा में कदम बढ़ाते हैं और क्या संवाद का रास्ता स्थायी समाधान तक पहुंच पाता है।



