पंजाब

भूपेश बघेल के दौरे से पहले मुक्तसर में ‘Go Back Baghel’ पोस्टर, पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह फिर आई सामने

पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के मुक्तसर दौरे से पहले शहर में 'Go Back Baghel' और 'राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ' जैसे पोस्टर लगाए गए। जानिए पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर पूरी रिपोर्ट।

पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रही गुटबाजी अब खुले तौर पर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। पार्टी के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के मुक्तसर और बठिंडा दौरे से पहले शहर के अलग-अलग इलाकों में उनके विरोध में पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में ‘Go Back Baghel’ जैसे संदेश लिखे गए हैं। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्यभर में संगठन मजबूत करने का अभियान चला रही है।

‘Go Back Baghel’ पोस्टरों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल

भूपेश बघेल के प्रस्तावित दौरे से पहले मुक्तसर शहर में कई स्थानों पर बड़े-बड़े पोस्टर और फ्लेक्स लगाए गए, जिन्होंने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया। पोस्टरों में भूपेश बघेल को ब्रिटिश शासनकाल के अधिकारी जैसी वर्दी में दर्शाया गया और नीचे अंग्रेजी में ‘Go Back Baghel’ लिखा गया। पोस्टरों की प्रस्तुति ऐतिहासिक ‘Simon Go Back’ आंदोलन की शैली से मिलती-जुलती बताई जा रही है।

इन पोस्टरों के सामने आने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन्हें किस संगठन या समूह की ओर से लगाया गया।

चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में भी लगे पोस्टर

भूपेश बघेल के विरोध के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में भी कई पोस्टर लगाए गए। कुछ पोस्टरों पर ‘राजा-बघेल हटाओ, कांग्रेस बचाओ’ जैसे नारे लिखे गए, जबकि अन्य पोस्टरों में राहुल गांधी से पंजाब में चन्नी को नेतृत्व देने की मांग की गई।

इन नारों को कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पोस्टरबाजी से पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।

‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के बीच बढ़ा विवाद

कांग्रेस इन दिनों पंजाब में ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी करना है।

लेकिन अभियान के दौरान लगातार सामने आ रहे विरोध के स्वर पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। मुक्तसर में पोस्टर लगने की घटना ने संगठनात्मक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी कई जिलों में दिख चुकी है गुटबाजी

यह पहला मौका नहीं है जब पंजाब कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक रूप से सामने आई हो। इससे पहले बरनाला में आयोजित संगठनात्मक बैठक के दौरान भी चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने उनके पक्ष में नारे लगाए थे, जिससे कार्यक्रम का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया था।

इसी तरह पटियाला और संगरूर में भी कांग्रेस के कार्यक्रमों के दौरान अलग-अलग गुटों के समर्थकों के बीच नारेबाजी और विरोध की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ स्थानों पर कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की खबरें भी आई थीं।

2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठनात्मक एकता की चुनौती

पंजाब कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है और पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन लगातार सामने आ रही गुटबाजी और सार्वजनिक विरोध की घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि पार्टी के भीतर मतभेद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस को 2027 के चुनाव में मजबूत चुनौती पेश करनी है, तो सबसे पहले उसे अपने संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों को दूर करना होगा। फिलहाल मुक्तसर में सामने आई पोस्टरबाजी ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति के साथ-साथ आंतरिक एकजुटता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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