पंजाब

चन्नी या वड़िंग… किस पर ज्यादा भरोसा? 9 दिन तक बूथ स्तर पर फीडबैक लेंगे भूपेश बघेल, फिर होगा बड़ा फैसला

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच अब पार्टी हाईकमान ने जमीनी हकीकत जानने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल 9 दिनों तक राज्यभर में बूथ स्तर पर फीडबैक जुटाएंगे। इसके बाद वह अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे, जिसके आधार पर आगे की रणनीति और संगठन से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

पंजाब कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। चन्नी समर्थक मानते हैं कि राजा वड़िंग के नेतृत्व में पार्टी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष बदला जाना चाहिए।

वहीं, राजा वड़िंग अपने साथ जिला अध्यक्षों, ब्लॉक नेताओं और कार्यकर्ताओं के समर्थन का दावा कर रहे हैं। दोनों गुट हाईकमान के सामने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में जुटे हुए हैं।

9 दिन तक बूथ स्तर से जुटेगी रिपोर्ट

भूपेश बघेल का यह दौरा महज औपचारिक नहीं माना जा रहा। वह प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, ब्लॉक पदाधिकारियों और स्थानीय नेताओं से सीधे संवाद करेंगे। इसका उद्देश्य यह जानना है कि संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच किस नेता की स्वीकार्यता अधिक है और पार्टी की वास्तविक स्थिति क्या है। यह फीडबैक भविष्य की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक फैसलों के लिए अहम माना जा रहा है।

‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान की शुरुआत

भूपेश बघेल ने अपने दौरे की शुरुआत ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान से की है। पहले दिन फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद और मोहाली में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इनमें ब्लॉक और जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी, सेवा दल, यूथ कांग्रेस, 2022 विधानसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार और सांसद भी शामिल होंगे। इन बैठकों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग भी भूपेश बघेल के साथ मौजूद रहेंगे।

हर जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे बघेल

बैठकों के बाद भूपेश बघेल प्रत्येक जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। इस दौरान वह संगठन की गतिविधियों की जानकारी देने के साथ-साथ केंद्र और पंजाब सरकार के मुद्दों पर कांग्रेस का पक्ष भी रखेंगे।

समय से पहले चुनाव के भी दिए संकेत

भूपेश बघेल ने कहा है कि कांग्रेस अब पूरी तरह चुनावी मोड में काम करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां बनीं तो पंजाब विधानसभा चुनाव तय समय 2027 से पहले भी हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए पार्टी ने संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने का अभियान शुरू किया है।

बघेल के सामने दो बड़ी चुनौतियां

भूपेश बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी खत्म कर सभी नेताओं को एक मंच पर लाना है। दूसरी चुनौती हाईकमान के फैसलों को जमीनी स्तर पर लागू कराना है।

गौरतलब है कि पिछली बार उनके पंजाब दौरे के दौरान चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा गुट ने कुछ बैठकों से दूरी बना ली थी। वहीं, हाईकमान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि फिलहाल राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।

क्या फीडबैक के बाद बदलेगी पंजाब कांग्रेस की तस्वीर?

पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। ऐसे में भूपेश बघेल का 9 दिवसीय दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। बूथ स्तर से मिलने वाली रिपोर्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है कि विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि हाईकमान बघेल की रिपोर्ट के आधार पर क्या फैसला लेता है।

Related Articles

Back to top button