मध्य प्रदेश

उज्जैन में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’, चांदी की पालकी में निकले बाबा; रामघाट पर हुआ पूजन

श्रावण के दूसरे सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकली। चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप में बाबा महाकाल ने नगर भ्रमण किया। रामघाट पर मां क्षिप्रा के जल से पूजन हुआ और भक्तों ने जयकारों से स्वागत किया।

श्रावण माह के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल की सवारी के दौरान पूरा उज्जैन भक्तिमय नजर आया। सवारी के दर्शन के लिए शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन किया गया। इसके बाद आरती संपन्न हुई। शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने पूजन और आरती कराई। पूजन के बाद भगवान महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में चांदी की पालकी पर विराजमान हुए। वहीं मनमहेश स्वरूप को हाथी पर विराजित किया गया और इसके बाद बाबा महाकाल नगर भ्रमण के लिए रवाना हुए।

मंदिर के बाहर दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

बाबा महाकाल की सवारी जब मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची तो सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वहीं हाथी पर सवार मनमहेश स्वरूप पर पुष्पवर्षा की गई। सवारी के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए खड़े रहे। भक्तों ने फूल बरसाकर बाबा का स्वागत किया और लगातार जय श्री महाकाल के जयकारे लगाए।

महाकाल की सवारी पहुंची रामघाट

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में बाबा महाकाल मां क्षिप्रा के तट पर पहुंचे। रामघाट पर मां क्षिप्रा के जल से भगवान का पूजन किया गया। इसके बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी। सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।

जनजातीय नृत्य ने बढ़ाई सवारी की भव्यता

दूसरे सोमवार की सवारी में जनजातीय नृत्य खास आकर्षण का केंद्र रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप इस बार सवारी में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए जनजातीय नृत्य दलों को शामिल किया गया। नृत्य दलों ने पारंपरिक वेशभूषा में रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। श्रद्धालुओं ने भी इन प्रस्तुतियों का आनंद लिया। अलग-अलग थीम के जरिए बाबा महाकाल की सवारी को और भव्य बनाने की कोशिश की गई।

भजन मंडलियां और घुड़सवार रहे आगे

बाबा महाकाल की सवारी में सबसे आगे घुड़सवार और पुलिस बल चल रहा था। इसके साथ ही अलग-अलग भजन मंडलियां भगवान शिव के भजनों और स्तुतियों का गायन कर रही थीं। भक्त डमरू और मंजीरे बजाते हुए बाबा महाकाल का गुणगान करते नजर आए। महिलाओं की भजन मंडलियों ने भी शिव स्तुतियां प्रस्तुत कीं। विशाल ध्वज के साथ निकली बाबा महाकाल की पालकी ने पूरे सवारी मार्ग को भक्तिमय बना दिया।

चलित रथ से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल की सवारी के आसानी से दर्शन कराने के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से चलित रथ की व्यवस्था की गई। रथ के दोनों ओर लगी LED स्क्रीन के जरिए सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। इससे सवारी मार्ग से दूर खड़े श्रद्धालु भी बाबा महाकाल के दर्शन कर सके। इस व्यवस्था से भीड़ वाले इलाकों में मौजूद भक्तों को सवारी देखने में सुविधा मिली।

जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा

पूरे सवारी मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और जगह-जगह बाबा महाकाल पर पुष्पवर्षा की गई। भक्तों ने जय श्री महाकाल के जयकारों के साथ बाबा का स्वागत किया। सवारी मार्ग पर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से आकर्षक रंगोली भी बनाई गई। के.बी. पंड्या और उनके समूह ने रंगोली के जरिए चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश स्वरूप का स्वागत किया। पूरे आयोजन के दौरान उज्जैन में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।

चांदी की पालकी में बाबा के दर्शन ने मोहा मन

श्रावण के दूसरे सोमवार की सवारी में बाबा महाकाल के चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे। चांदी की पालकी, हाथी पर विराजमान मनमहेश स्वरूप, भजन मंडलियों की प्रस्तुतियां और जयकारों से पूरा शहर शिवमय नजर आया। रामघाट पर मां क्षिप्रा के जल से पूजन के साथ सवारी ने धार्मिक और पारंपरिक महत्व को भी और खास बना दिया।

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