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फेस्टिव सीजन में Tata Motors की EVs की बढ़ सकती है डिमांड, सप्लाई बनी सबसे बड़ी चुनौती

  त्योहारी सीजन में Tata Motors की इलेक्ट्रिक कारों की मांग तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। कंपनी के मुताबिक फरवरी की तुलना में EV की मांग करीब साढ़े तीन गुना तक बढ़ चुकी है। अब उत्पादन बढ़ाना कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

Tata Motors को आने वाले त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री मजबूत रहने की उम्मीद है। कंपनी के पैसेंजर व्हीकल कारोबार के मुताबिक फरवरी के मुकाबले मौजूदा समय में EV की मांग करीब 3 से 3.5 गुना तक बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि बाजार में नए इलेक्ट्रिक मॉडल आने के बावजूद मांग के मुकाबले पर्याप्त गाड़ियों की उपलब्धता अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्राहकों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए कंपनी ने उत्पादन क्षमता में भी इजाफा शुरू कर दिया है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में उसकी EV बिक्री 70 फीसदी से अधिक बढ़ सकती है। साथ ही EV बाजार में 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य भी रखा गया है।

पहली तिमाही में 34 हजार से ज्यादा EV बिकीं

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अब तक की सबसे अधिक 34 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री दर्ज की। कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में EV की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही। जुलाई में कंपनी ने 15 हजार पैसेंजर व्हीकल्स की थोक बिक्री भी दर्ज की। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए Tata Motors ने उत्पादन क्षमता करीब 9 हजार यूनिट से बढ़ाकर 15 हजार से अधिक यूनिट कर दी है।

आगे और बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

कंपनी की योजना आने वाले महीनों में EV उत्पादन को और बढ़ाने की है। Tata Motors का मानना है कि त्योहारी सीजन में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में कंपनी की प्राथमिकता ग्राहकों की मांग के मुताबिक समय पर वाहन उपलब्ध कराना है। अगर उत्पादन और सप्लाई के बीच अंतर बना रहा तो बुकिंग बढ़ने के बावजूद डिलीवरी में देरी हो सकती है।

कच्चे माल की बढ़ती कीमत भी चिंता

EV कारोबार के साथ कंपनी को बढ़ती लागत की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। Tata Motors के मुताबिक पहली तिमाही में कमोडिटी कीमतों का असर कंपनी के रेवेन्यू पर करीब 4.5 फीसदी रहा। जून 2026 में समाप्त तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 80 फीसदी घटकर 775 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल यह 3924 करोड़ रुपये था। कंपनी का कहना है कि बढ़ी लागत का पूरा भार ग्राहकों पर डालने के बजाय पहले खर्च घटाने पर ध्यान दिया जाएगा।

Sierra की मांग भी मजबूत

Tata Motors की Sierra को भी बाजार से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने की बात सामने आई है। इसके इलेक्ट्रिक वर्जन ने भी ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ाई है। हालांकि कास्टिंग और शीट-मेटल की सप्लाई से जुड़ी कुछ परेशानियां सामने आई हैं। कंपनी को उम्मीद है कि अक्टूबर से अतिरिक्त उत्पादन क्षमता शुरू होने के बाद स्थिति में सुधार आएगा।

विदेशों में भी विस्तार की तैयारी

Tata Motors घरेलू बाजार के साथ विदेशी कारोबार बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है। दक्षिण अफ्रीका में कंपनी की बिक्री में सुधार देखने को मिला है। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कंपनी ने 2432 वाहनों का निर्यात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1035 यूनिट था। कंपनी FY27 के अंत या FY28 की शुरुआत तक एक और बड़े विदेशी बाजार में प्रवेश करने की योजना बना रही है।

EV और CNG रहेंगे ग्रोथ के बड़े सहारे

कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पैसेंजर व्हीकल बाजार 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकता है। हालांकि साल की दूसरी छमाही में पिछले साल की मजबूत बिक्री के कारण रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। Tata Motors के लिए EV और CNG आगे भी अहम ग्रोथ क्षेत्र बने रहेंगे। वहीं अगर ग्राहकों का रुझान हाइब्रिड वाहनों की ओर बढ़ता है तो कंपनी बाजार की जरूरत के अनुसार अपनी रणनीति बदलने के लिए तैयार है।

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