देश

ISRO, IB, IIT… NTA सुधार के लिए मोदी ने उतारे देश के सबसे बड़े दिमाग, देखिए पूरी टीम

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए गठित हाई-पावर टास्क फोर्स की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। इस टीम में विज्ञान, सुरक्षा, शिक्षा, प्रशासन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े देश के छह प्रमुख विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा करेगी और ऐसे सुझाव देगी, जिनसे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को और मजबूत बनाया जा सके। इसका उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है।

ये हैं टास्क फोर्स के छह बड़े चेहरे

हाई-पावर पैनल की अध्यक्षता नंदन नीलेकणि करेंगे। उनके साथ जिन विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, उनमें—

  • पूर्व इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ
  • पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक तपन डेका
  • आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि
  • पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
  • लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा

शामिल हैं। सरकार का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों के इन विशेषज्ञों का अनुभव परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का रोडमैप तैयार करने में मदद करेगा।

साइबर सिक्योरिटी से लेकर लॉजिस्टिक्स तक होगा फोकस

टास्क फोर्स परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण की समीक्षा करेगी। इसमें प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तंत्र, परीक्षा केंद्रों की लॉजिस्टिक्स, संचालन व्यवस्था और तकनीकी निगरानी जैसे अहम पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पैनल यह भी सुझाव देगा कि भविष्य में परीक्षा संचालन को किस तरह अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना न्यूनतम हो।

नीट विवाद के बाद सरकार का बड़ा कदम

यह फैसला ऐसे समय आया है जब नीट-यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर पूरे देश में परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठे। इसी घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने सुधारों की दिशा में यह हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया, ताकि छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत किया जा सके।

सिफारिशों के आधार पर बदल सकती है पूरी परीक्षा व्यवस्था

सरकार की उम्मीद है कि विशेषज्ञों की यह समिति केवल तत्काल समाधान नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए ऐसी व्यवस्था सुझाएगी जिससे राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं अधिक भरोसेमंद, निष्पक्ष और तकनीक-सक्षम बन सकें। यदि टास्क फोर्स की सिफारिशें लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की परीक्षा प्रणाली में कई बड़े संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Related Articles

Back to top button