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कभी ममता बनर्जी की सियासत का बड़ा चेहरा थीं सायोनी घोष, अब विपक्ष पर बरसीं… संसद में NDA के रुख का खुलकर किया समर्थन

पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर है, वहीं तृणमूल कांग्रेस से अलग हो चुकीं सांसद सायोनी घोष ने विपक्षी दलों की रणनीति पर सवाल उठाते हुए संसद में चर्चा से दूरी बनाने को लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना पद छोड़ दिया। इसके बावजूद संसद के भीतर हंगामा थमता नजर नहीं आया। विपक्ष सरकार पर हमले जारी रखे हुए है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि अब सदन में मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। इसी बहस के बीच सायोनी घोष का बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

‘बहस से दूरी लोकतंत्र के हित में नहीं’

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) की सांसद सायोनी घोष ने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब इस्तीफे की मांग पूरी हो चुकी है तो अब चर्चा से पीछे हटने का कोई औचित्य नहीं बचता। उनके मुताबिक संसद बहस और जवाबदेही का मंच है, इसलिए लगातार व्यवधान पैदा करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं माना जा सकता।

‘संसद का हर मिनट देश के पैसे से चलता है’

सायोनी घोष ने कहा कि संसद की कार्यवाही में लगने वाला हर पल जनता के टैक्स के पैसे से संचालित होता है। ऐसे में लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होना देश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को चर्चा और समाधान के लिए चुनकर भेजती है, न कि केवल विरोध दर्ज कराने के लिए।

छात्रों के सामने भी रखी अपनी दलील

सांसद ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों को यह जानने का अधिकार है कि शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव क्या हैं और नए कानून के जरिए किन सुधारों की कोशिश की जा रही है। उनके अनुसार यदि विपक्ष के पास बेहतर सुझाव हैं तो उन्हें सदन में रखना चाहिए, ताकि उन पर विचार किया जा सके और आवश्यक बदलाव किए जा सकें।

सरकार को भी दी रचनात्मक संवाद की सलाह

सायोनी घोष ने यह भी कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि विपक्ष की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक आलोचना लोकतंत्र की ताकत होती है। यदि विपक्ष अपने सुझाव रखे और सरकार उन पर सकारात्मक ढंग से विचार करे, तभी संसद की वास्तविक भूमिका पूरी हो सकती है।

बयान से तेज हुई नई राजनीतिक बहस

सायोनी घोष के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। एक समय ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सायोनी घोष अब विपक्षी रणनीति पर खुलकर सवाल उठा रही हैं। ऐसे में उनके बयान को संसद में जारी गतिरोध और बदलते राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

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