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NDA बैठक से क्यों गायब रहे TMC छोड़ने वाले तीन मुस्लिम सांसद? अटकलों का बाजार गर्म, जानिए पूरा मामला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए सांसदों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल ही में एनडीए (NDA) की बैठक में टीएमसी छोड़कर NCPI में शामिल हुए अधिकांश सांसद पहुंचे, लेकिन तीन मुस्लिम सांसदों की गैरमौजूदगी ने कई तरह के राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति की आधिकारिक वजह अभी सामने नहीं आई है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने पार्टी छोड़कर NCPI में शामिल होने का ऐलान किया था। इन सांसदों ने खुद को एनडीए का सहयोगी बताया और लोकसभा अध्यक्ष से NCPI को अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता देने की मांग भी की। हालांकि, अब तक लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से इस विलय या संसदीय दल को औपचारिक मान्यता नहीं दी गई है।

मान्यता लंबित होने के बावजूद NCPI से जुड़े कई सांसदों को एनडीए की बैठक में बुलाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय और सयानी घोष बैठक में शामिल हुईं। बैठक के बाद नेताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें एनडीए के सहयोगी दल के प्रतिनिधियों के रूप में अन्य दलों से परिचित कराया।

इसी मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए कि जब NCPI को अभी तक संसदीय मान्यता नहीं मिली है, तब उसके नेताओं को बैठक में क्यों बुलाया गया।

किन तीन सांसदों की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल?

सूत्रों के अनुसार, अबू ताहिर, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तीनों सांसद संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में मौजूद थे, लेकिन बैठक में नहीं पहुंचे। इसी वजह से उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, तीनों सांसदों या NCPI की ओर से उनकी गैरहाजिरी की कोई आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या बीजेपी में विलय की अटकलों से जुड़ा है मामला?

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में NCPI का भारतीय जनता पार्टी के साथ विलय हो सकता है। इसी संदर्भ में तीन मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति को लेकर अलग-अलग तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

कुछ राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि कुछ सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्रों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आगे की रणनीति तय करना चाहते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल केवल अटकलें, कोई आधिकारिक बयान नहीं

तीनों सांसदों की गैरमौजूदगी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।

न तो संबंधित सांसदों ने सार्वजनिक रूप से कोई बयान दिया है और न ही NCPI या एनडीए की ओर से इस विषय पर आधिकारिक जानकारी साझा की गई है।

आगे क्या होगा?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी से अलग हुए सांसदों की भूमिका पर सबकी नजर बनी हुई है। लोकसभा में NCPI की मान्यता, एनडीए के साथ उसके संबंध और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, तीन मुस्लिम सांसदों की एनडीए बैठक से अनुपस्थिति को लेकर कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान या घटनाक्रम का इंतजार करना उचित होगा।

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