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Recharge Rules: रिचार्ज खत्म, बंद होगी इनकमिंग कॉल? संसद में सरकार का जवाब

मोबाइल रिचार्ज खत्म होने के बाद इनकमिंग कॉल बंद होने का सवाल लंबे समय से मोबाइल यूजर्स के बीच चर्चा का विषय रहा है। अब यह मुद्दा संसद तक पहुंचा, जहां सरकार से पूछा गया कि क्या टेलीकॉम कंपनियां नियमों के तहत ऐसा करती हैं और क्या सरकार इस पर कोई नया नियम लाने की तैयारी कर रही है। आइए जानते हैं सरकार ने क्या जवाब दिया।

मोबाइल रिचार्ज, बढ़ती टेलीकॉम कीमतें और इनकमिंग कॉल बंद होने की समस्या करोड़ों उपभोक्ताओं से जुड़ा मुद्दा है। इसी वजह से संसद में इस विषय पर विस्तार से सवाल पूछे गए, ताकि लोगों के बीच मौजूद भ्रम दूर हो सके।

राजस्थान के बांसवाड़ा से सांसद राजकुमार रोत ने सरकार से पूछा कि रिचार्ज वैलिडिटी समाप्त होने के बाद इनकमिंग सेवाएं रोकने की नीति कब लागू हुई, इसका कानूनी और नियामकीय आधार क्या है तथा इस व्यवस्था से टेलीकॉम कंपनियों को कितना राजस्व मिला है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि दो सिम कार्ड रखने वाले उपभोक्ताओं की परेशानी दूर करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।

क्या इनकमिंग कॉल बंद करने का कोई नियम है?

संसद में पूछे गए सबसे अहम सवालों में यह भी शामिल था कि क्या रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद करना किसी सरकारी नियम या ट्राई के निर्देश का हिस्सा है। इस पर सरकार ने स्पष्ट स्थिति सामने रखी।

संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने बताया कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) एक्ट, 1997 के तहत टैरिफ तय करने का अधिकार ट्राई के पास है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियामकीय ढांचे में रिचार्ज वैलिडिटी खत्म होने के तुरंत बाद इनकमिंग सेवाएं बंद करना कोई अनिवार्य नियामकीय प्रावधान (Regulatory Mandate) नहीं है।

टेलीकॉम कंपनियों को कितनी छूट है?

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में कंपनियों को अपने टैरिफ प्लान तैयार करने की पर्याप्त स्वतंत्रता दी गई है। हालांकि उन्हें ट्राई द्वारा तय किए गए नियमों और नियामकीय ढांचे का पालन करना अनिवार्य है।

सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय रोमिंग, ग्रामीण फिक्स्ड लाइन, मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी और लीज्ड सर्किट जैसी कुछ सेवाओं को छोड़कर मोबाइल और डेटा सेवाओं के टैरिफ पर फोरबेयरेंस (Forbearance) लागू है। इसका मतलब है कि कंपनियां बाजार की स्थिति और व्यावसायिक जरूरतों के आधार पर अपने प्लान डिजाइन कर सकती हैं।

28 दिन नहीं, 30 दिन की वैधता पर क्या कहा गया?

संसद में यह सवाल भी पूछा गया कि क्या सरकार सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए 28 दिन की जगह 30 दिन की वैधता वाले रिचार्ज प्लान अनिवार्य बनाने जा रही है।

इस पर सरकार ने बताया कि TRAI पहले ही अपने 66वें और 67वें संशोधन के जरिए यह व्यवस्था लागू कर चुका है कि प्रत्येक दूरसंचार सेवा प्रदाता कम से कम एक प्लान वाउचर, एक स्पेशल टैरिफ वाउचर और एक कॉम्बो वाउचर 30 दिनों की वैधता के साथ उपलब्ध कराएगा।

हर महीने एक ही तारीख पर रिचार्ज का भी प्रावधान

सरकार ने जानकारी दी कि ट्राई के नियमों के अनुसार प्रत्येक टेलीकॉम कंपनी को ऐसा कम से कम एक प्लान देना होगा, जिसे हर महीने एक ही तारीख पर रिन्यू किया जा सके।

यदि किसी महीने में वह तारीख मौजूद नहीं होती, जैसे फरवरी में 30 या 31 तारीख, तो ऐसे मामलों में रिचार्ज की वैधता उस महीने के आखिरी दिन तक मानी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को हर महीने अलग-अलग तारीख याद रखने की परेशानी से राहत देना है।

मोबाइल यूजर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

सरकार के जवाब से साफ है कि रिचार्ज खत्म होने के बाद इनकमिंग कॉल तुरंत बंद करना TRAI का अनिवार्य नियम नहीं है। साथ ही 30 दिन की वैधता वाले प्लान उपलब्ध कराने का प्रावधान पहले से लागू है।

ऐसे में यदि उपभोक्ता अपनी जरूरत के मुताबिक प्लान चुनना चाहते हैं, तो वे अपने टेलीकॉम ऑपरेटर द्वारा उपलब्ध कराए गए 30 दिन की वैधता वाले प्लान और मासिक रिन्यूअल विकल्पों की जानकारी लेकर बेहतर फैसला कर सकते हैं।

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