राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में बाधा डालना पड़ेगा भारी, 3 साल तक जेल या जुर्माना… जानें क्या है नया कानून
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने के लिए 1971 के राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण कानून में संशोधन किया है। संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित हो चुका है। इसके तहत राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
The Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 के जरिए 1971 के कानून की धारा 3 के दायरे को बढ़ाया गया है। अब इसमें राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों को समान कानूनी संरक्षण देना है।
संसद के दोनों सदनों से पास हो चुका है बिल
यह विधेयक 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया था। राज्यसभा ने इसे 29 जुलाई को पारित किया और इसके बाद 30 जुलाई को लोकसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी। यानी संसद से विधेयक पारित हो चुका है।
राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत में बाधा डाली तो क्या सजा होगी?
संशोधित प्रावधान के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को रोकता है या इसे गाने वाली सभा अथवा समूह के काम में बाधा डालता है, तो उसे तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
‘वंदे मातरम्’ को मिला समान कानूनी संरक्षण
अब तक 1971 के कानून में राष्ट्रगान से जुड़े प्रावधान स्पष्ट रूप से मौजूद थे, लेकिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को इसी तरह का विशेष वैधानिक संरक्षण नहीं मिला था। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत को भी इसी कानूनी दायरे में लाया गया है।
कानून में जानबूझकर बाधा डालने पर जोर
इस प्रावधान में खास तौर पर जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या सभा में व्यवधान डालने की बात कही गई है। यानी कानून का मुख्य निशाना जानबूझकर किया गया व्यवधान है, न कि हर सामान्य परिस्थिति को अपराध मान लेना।
पहले से राष्ट्रगान के लिए था सजा का प्रावधान
1971 के मूल कानून में राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में बाधा डालने पर पहले से ही तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। 2026 का संशोधन इसी व्यवस्था को राष्ट्रगीत तक विस्तार देता है।
एक जरूरी कानूनी अपडेट
आपके दिए मूल टेक्स्ट में यह कहा गया है कि संशोधन अधिनियम 6 अगस्त 2026 को राजपत्र में प्रकाशित होकर लागू हो गया है। उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड में फिलहाल विधेयक के संसद के दोनों सदनों से पारित होने की पुष्टि मिलती है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में राष्ट्रपति की मंजूरी और लागू होने की तारीख की पुष्टि नहीं मिली। इसलिए खबर में इसे ‘संशोधन विधेयक संसद से पारित’ कहना ज्यादा सुरक्षित और कानूनी रूप से सटीक है।



