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JPSC-JSSC विवाद: 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की तैयारी, छात्रों से बातचीत के बाद बड़ा अपडेट

  रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार तीन दिनों तक हुई बातचीत के बाद 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही बैकलॉग परीक्षाओं की जांच, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल और कथित आर्थिक लेन-देन की ED जांच पर भी चर्चा हुई है। अब सबकी नजर सरकार के अंतिम फैसले और छात्र संगठनों की अगली रणनीति पर है।

JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा के घेराव का ऐलान किया था। इससे पहले सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की गई। शुक्रवार रात सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच पहले दौर की बैठक हुई। इसके बाद शनिवार को भी मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का दौर चला। हालांकि शुरुआती बैठकों में विवाद का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पाया।

रविवार की बैठक में निकला अहम रास्ता

रविवार को हुई बैठक को पूरे विवाद में बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक के बाद 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा बैकलॉग परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर भी सहमति बनने की बात कही जा रही है।

अगर 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने का फैसला आधिकारिक रूप से लागू होता है तो आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की यह सबसे बड़ी मांग पूरी हो सकती है।

ED जांच को लेकर भी हुई चर्चा

बैठक में परीक्षा से जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा TDPL एजेंसी के जरिए कराई गई परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी सामने आई है। इससे परीक्षा प्रक्रिया में शामिल एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

हालांकि जांच का अंतिम स्वरूप क्या होगा और किन मामलों को इसमें शामिल किया जाएगा, इस पर सरकार के आधिकारिक फैसले का इंतजार है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को दिया भरोसा

पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्रों को भरोसा दिलाया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकार छात्रों के अधिकारों और उनके हितों को लेकर गंभीर है। उन्होंने यह भी भरोसा दिया कि अगर जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस रुख के बाद सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच गतिरोध कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

बैकलॉग परीक्षाओं की जांच भी महत्वपूर्ण

छात्रों की मांग सिर्फ 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग भी कर रहे हैं।

ऐसे में बैकलॉग परीक्षाओं की जांच और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की भूमिका की समीक्षा आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है।

अब 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर नजर

सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र संगठन अपने प्रस्तावित विधानसभा घेराव को लेकर क्या फैसला लेते हैं। अगर सरकार 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और जांच से जुड़े मुद्दों पर औपचारिक घोषणा करती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। लेकिन अगर अंतिम फैसला आने में देरी होती है तो छात्रों का आंदोलन और तेज होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार के फैसले से तय होगी आगे की दिशा

फिलहाल JPSC-JSSC विवाद में सबसे बड़ा सवाल 14वीं JPSC परीक्षा के भविष्य का है। 5300 नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े इस विवाद में सरकार और छात्रों के बीच बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।

अब देखना होगा कि सरकार 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने का औपचारिक फैसला कब करती है, ED और अन्य जांचों का दायरा कितना बढ़ता है और परीक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।

साथ ही छात्र संगठनों की अगली रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। आने वाले कुछ दिन झारखंड की परीक्षा व्यवस्था और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

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