क्या स्टेंट लगने के बाद हार्ट अटैक का खतरा खत्म हो जाता है? जानिए डॉक्टरों की राय
हार्ट में स्टेंट लगने के बाद क्या दोबारा हार्ट अटैक नहीं आता? जानिए विशेषज्ञ क्या कहते हैं, स्टेंट के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और जोखिम कैसे कम किया जा सकता है।
हार्ट अटैक के बाद कई मरीजों की बंद या संकरी धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य करने के लिए स्टेंट लगाया जाता है। हालांकि बहुत से लोगों के मन में यह धारणा होती है कि स्टेंट लगने के बाद भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह समाप्त हो जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सही नहीं है। स्टेंट इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ रहने के लिए दवाओं, नियमित जांच और जीवनशैली में बदलाव भी उतने ही आवश्यक हैं।
स्टेंट का काम क्या होता है?
स्टेंट एक छोटी जालीदार ट्यूब होती है, जिसे कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज वाले हिस्से पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य उस धमनी को खुला रखना और हृदय तक रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाना होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्टेंट से उस विशेष ब्लॉकेज का इलाज किया जाता है, लेकिन इससे शरीर में मौजूद हृदय रोग की मूल प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं होती। इसलिए आगे भी सावधानी बनाए रखना जरूरी होता है।
क्या स्टेंट के बाद भी हार्ट अटैक आ सकता है?
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि यदि मरीज डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से नहीं लेता, धूम्रपान जारी रखता है या ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित नहीं रखता, तो भविष्य में नई धमनियों में भी ब्लॉकेज विकसित हो सकती है।
कुछ मामलों में स्टेंट लगे हिस्से में भी दोबारा संकुचन (री-स्टेनोसिस) या रक्त का थक्का बनने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि आधुनिक दवा-युक्त (Drug-Eluting) स्टेंट और सही उपचार से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जीवनशैली में बदलाव क्यों है सबसे जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेंट लगने के बाद इलाज वहीं खत्म नहीं हो जाता। मरीज को लंबे समय तक अपने खानपान, शारीरिक गतिविधि और दैनिक आदतों पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और तंबाकू से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन आदतों को अपनाने से भविष्य में हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
दवाएं समय पर लेना और नियमित जांच कराना जरूरी
डॉक्टरों के अनुसार स्टेंट लगने के बाद दी जाने वाली ब्लड थिनर और अन्य दवाओं को बिना चिकित्सकीय सलाह के कभी भी बंद नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।
इसके अलावा समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहना भी जरूरी है। नियमित फॉलो-अप से डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर समय पर उपचार में बदलाव कर सकते हैं।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
यदि स्टेंट लगने के बाद भी सीने में दबाव या दर्द महसूस हो, सांस लेने में कठिनाई हो, अचानक अधिक पसीना आए या दर्द जबड़े, कंधे अथवा बाएं हाथ तक फैलने लगे, तो इसे सामान्य मानकर टालना नहीं चाहिए।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना और विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
डॉक्टरों की सलाह: स्टेंट इलाज है, स्थायी सुरक्षा नहीं
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेंट हृदय की बंद धमनी को खोलने का प्रभावी तरीका है, लेकिन इसे भविष्य में हार्ट अटैक से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता। सही दवाओं का नियमित सेवन, डॉक्टर की सलाह का पालन, स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच ही दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। यदि आपको हृदय संबंधी कोई समस्या, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत योग्य हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।



