कार के निवेश पर 1% से भी कम रिटर्न, CAG रिपोर्ट में सब्सिडी और कैपिटल खर्च पर बड़ा खुलासा
दिल्ली विधानसभा में 2024-25 की CAG रिपोर्ट पेश होने के बाद सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में सब्सिडी बढ़ने के साथ कैपिटल खर्च घटने और सरकारी कंपनियों में बड़े निवेश पर 1% से कम रिटर्न का जिक्र है।
दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 से जुड़ी CAG रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के खर्च के पैटर्न को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। CAG के मुताबिक सरकार के कुल खर्च में रेवेन्यू खर्च का हिस्सा 88.38% रहा। तय खर्चों और बढ़ती सब्सिडी के कारण कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए वित्तीय गुंजाइश सीमित हुई। रिपोर्ट में 2015-25 के दौरान सब्सिडी में 172.48% की बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है। इसी अवधि में कैपिटल खर्च में गिरावट का रुझान सामने आया। इसके अलावा सरकारी कंपनियों और PSUs में किए गए हजारों करोड़ रुपये के निवेश पर मिलने वाला सालाना रिटर्न 1% से भी कम रहा।
सब्सिडी बढ़ी, कैपिटल खर्च में आई गिरावट
CAG रिपोर्ट के मुताबिक 2015-25 के दौरान दिल्ली सरकार की सब्सिडी में 3,222 करोड़ रुपये यानी 172.48% की बढ़ोतरी हुई। इसमें बिजली सब्सिडी का बड़ा योगदान रहा, जो इसी अवधि में 2,033 करोड़ रुपये यानी 128.83% बढ़ी। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेवेन्यू खर्च और सब्सिडी पर बढ़ते दबाव के कारण विकास और कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश सीमित हुई। इसका असर लंबे समय में इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण पर पड़ सकता है।
कैपिटल खर्च में लगातार गिरावट का रुझान
रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के कैपिटल खर्च में लगातार बढ़ोतरी के बजाय गिरावट का रुझान दर्ज किया गया है। साल 2021-22 में कैपिटल खर्च 8,311 करोड़ रुपये था, जो घटकर 2024-25 में 3,695 करोड़ रुपये रह गया। 2015-25 के दौरान कुल खर्च में कैपिटल खर्च का हिस्सा करीब 7% से 15% के बीच रहा। CAG के मुताबिक यह स्थिति लंबे समय के एसेट निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को लेकर चिंता पैदा करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास लक्ष्यों के अनुरूप परिसंपत्ति निर्माण को लगातार प्राथमिकता देने की जरूरत है।
विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने की सलाह
CAG ने दिल्ली सरकार को संभावित विकास को गति देने के लिए फिजिकल और ह्यूमन कैपिटल निर्माण पर अधिक निवेश की जरूरत बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर ध्यान देना चाहिए। इसमें बेहतर टैक्स कलेक्शन, टैक्स अनुपालन बढ़ाने के लिए मजबूत एनफोर्समेंट और नॉन-टैक्स रेवेन्यू बढ़ाने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट में वित्तीय अनुशासन और कर्ज की स्थिरता को लेकर स्थिति को अपेक्षाकृत बेहतर बताया गया है, लेकिन विकास से जुड़े निवेश को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।
सरकारी कंपनियों में ₹21,810 करोड़ का निवेश
CAG रिपोर्ट में दिल्ली सरकार द्वारा PSUs और सरकारी कंपनियों में किए गए निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर भी सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में इन संस्थानों में सरकार का निवेश 18,492 करोड़ रुपये था। यह निवेश बढ़कर 2024-25 में 21,810 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन इतने बड़े निवेश के मुकाबले सरकार को मिलने वाला डिविडेंड और मुनाफा बेहद कम रहा। रिपोर्ट के मुताबिक निवेश पर सालाना रिटर्न 1% से भी कम रहा।
निवेश बढ़ा, लेकिन कमाई क्यों नहीं?
CAG के आंकड़े बताते हैं कि सरकार का निवेश लगातार बढ़ा, लेकिन उसके मुकाबले मिलने वाला वित्तीय रिटर्न उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाया। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी कंपनियों और PSUs में लगाए गए हजारों करोड़ रुपये का इस्तेमाल कितना प्रभावी रहा। कम रिटर्न का असर सरकार की वित्तीय स्थिति और भविष्य में निवेश की क्षमता पर भी पड़ सकता है। CAG रिपोर्ट के जरिए इस निवेश की उपयोगिता और उससे मिलने वाले लाभ पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
कर्ज को लेकर स्थिति, लेकिन विकास खर्च पर चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार के कर्ज का ट्रेंड वित्तीय दबाव के लिहाज से अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला दिखाई देता है। रिपोर्ट में अनुशासित उधार और अनुकूल सस्टेनेबिलिटी इंडिकेटर्स का उल्लेख किया गया है। हालांकि CAG ने यह भी कहा कि उधार का इस्तेमाल मुख्य रूप से कर्ज चुकाने के बजाय विकास को बढ़ावा देने वाले निवेश में होना चाहिए। इसके लिए सरकार को अतिरिक्त संसाधन जुटाने और विकास से जुड़े खर्च को मजबूत करने की जरूरत है।
सात साल बाद विधानसभा में पेश हुई CAG रिपोर्ट
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा 2024-25 की CAG रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी इसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को मिलाकर विधानसभा में पेश की गई CAG रिपोर्ट की संख्या 19 हो गई है। उनके मुताबिक पिछले सात साल में कोई CAG रिपोर्ट सदन में पेश नहीं की गई थी। अब रिपोर्ट में सामने आए वित्तीय आंकड़ों और टिप्पणियों पर विधानसभा में चर्चा की जाएगी।
अब सवाल- सब्सिडी और निवेश का संतुलन कैसे बनेगा?
CAG रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां रखी हैं। एक तरफ सब्सिडी पर खर्च लगातार बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ कैपिटल खर्च में गिरावट दर्ज हुई है। दूसरी ओर सरकारी कंपनियों में 21,810 करोड़ रुपये के निवेश के बावजूद सालाना रिटर्न 1% से कम रहा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली सरकार सब्सिडी, विकास खर्च और सरकारी निवेश के बीच संतुलन कैसे बनाएगी और भविष्य में सीमित संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह ज्यादा प्रभावी तरीके से करेगी।



