Health: डार्क चॉकलेट क्यों बन रही हेल्थ एक्सपर्ट्स की नई पसंद?
एक दौर था जब चॉकलेट का नाम सुनते ही लोग इसे मोटापा, शुगर और अनहेल्दी लाइफस्टाइल से जोड़ देते थे। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि 70% या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट, अगर सीमित मात्रा में खाई जाए, तो यह शरीर को कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचा सकती है।
हर चॉकलेट एक जैसी नहीं होती। बाजार में मिलने वाली मिल्क चॉकलेट और डार्क चॉकलेट के बीच सबसे बड़ा अंतर कोको की मात्रा और चीनी की मात्रा का होता है। डार्क चॉकलेट में आमतौर पर कोको अधिक और चीनी कम होती है। यही वजह है कि इसे सामान्य चॉकलेट की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि अगर डार्क चॉकलेट खानी है, तो उसमें कम से कम 70% कोको होना चाहिए।
दिल के लिए क्यों मानी जाती है बेहतर?
डार्क चॉकलेट में मौजूद फ्लेवोनॉयड्स नामक एंटीऑक्सीडेंट रक्त वाहिकाओं के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे रक्त संचार बेहतर हो सकता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है।
कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
तनाव कम करने में भी निभा सकती है भूमिका
दिनभर की भागदौड़ और मानसिक दबाव के बीच डार्क चॉकलेट मूड बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। माना जाता है कि इसे खाने से मस्तिष्क में ऐसे रसायनों का स्राव बढ़ सकता है, जो खुशी और सुकून का एहसास कराते हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे प्राकृतिक मूड बूस्टर भी कहते हैं।
दिमाग की सेहत को भी मिल सकता है फायदा
कोको से भरपूर डार्क चॉकलेट मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक सक्रियता को सहयोग मिल सकता है। हालांकि, यह किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का उपचार नहीं है। डार्क चॉकलेट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री-रेडिकल्स और यूवी किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।
इसके अलावा, सीमित मात्रा में इसका सेवन मीठा खाने की तीव्र इच्छा को कम करने और लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास दिलाने में भी मददगार हो सकता है। इससे संतुलित खानपान बनाए रखने में आसानी हो सकती है।
लेकिन कहानी सिर्फ फायदों की नहीं…
डार्क चॉकलेट तभी तक फायदेमंद मानी जाती है, जब इसे सीमित मात्रा में खाया जाए। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर इसमें मौजूद कैलोरी और वसा वजन बढ़ाने का कारण भी बन सकती है। इसलिए विशेषज्ञ आमतौर पर रोज 1-2 छोटे टुकड़ों से अधिक न खाने की सलाह देते हैं। यानी बदली चॉकलेट नहीं, बदली है उसे देखने की समझ। अब बात सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि सही चुनाव की है।
अगर आप 70% या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट को संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं, तो यह दिल, दिमाग, त्वचा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, डायबिटीज, मोटापा या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसे नियमित रूप से खाने से पहले अपने डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह जरूर लेनी चाहिए।



