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डायबिटीज में पैरों का खास ख्याल क्यों है जरूरी? छोटी लापरवाही भी बन सकती है बड़ी परेशानी, जानें बचाव के तरीके

डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ाने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। इनमें पैर सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हिस्सों में शामिल हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर पैरों की नसें और रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे घाव, संक्रमण और गंभीर मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ सकती है। ऐसे में पैरों की रोजाना देखभाल डायबिटीज मैनेजमेंट का अहम हिस्सा मानी जाती है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के अनुसार, लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

इस समस्या के कारण पैरों में झनझनाहट, जलन, दर्द या सुन्नपन महसूस हो सकता है। कई बार मरीज को पैर में लगी चोट, कट या छाले का एहसास भी नहीं होता। यदि समय पर इलाज न मिले तो मामूली घाव भी गंभीर संक्रमण का रूप ले सकता है।

किन समस्याओं का बढ़ जाता है खतरा?

डायबिटीज के कारण पैरों तक रक्त का प्रवाह कम हो सकता है, जिससे घाव भरने में अधिक समय लगता है। इसके अलावा संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।

इसके चलते मरीजों में सूखी त्वचा, फटी एड़ियां, बार-बार छाले पड़ना, घाव, संक्रमण और कुछ मामलों में पैरों की बनावट में बदलाव जैसी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं। इसलिए पैरों में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन संकेतों को बिल्कुल हल्के में न लें

यदि पैर में बना घाव लंबे समय तक ठीक न हो, त्वचा लाल या सूजी हुई दिखाई दे, पस निकलने लगे या पैर सामान्य से अधिक गर्म महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इसके अलावा लगातार दर्द, सुन्नपन, जलन, चलने में दिक्कत, त्वचा का रंग बदलना, नाखून के आसपास संक्रमण, बार-बार छाले पड़ना या अचानक सूजन आना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

डायबिटीज में पैरों की देखभाल कैसे करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को रोजाना अपने पैरों की जांच करनी चाहिए। पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं और त्वचा को सूखने से बचाने के लिए मॉइस्चराइजर लगाएं। हालांकि, उंगलियों के बीच क्रीम लगाने से बचें क्योंकि वहां नमी संक्रमण का कारण बन सकती है।

हमेशा सही फिटिंग वाले जूते और साफ मोजे पहनें। नंगे पैर चलने से बचें, चाहे घर के अंदर ही क्यों न हों। यदि कट, छाला, सूजन या त्वचा के रंग में कोई बदलाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

ब्लड शुगर कंट्रोल रखना भी उतना ही जरूरी

पैरों को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही काफी नहीं है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का समय पर सेवन करना भी बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के मरीज समय-समय पर पैरों की जांच भी कराते रहें। सही देखभाल और समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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