NEET Protest Ends: 36 दिन बाद आंदोलन खत्म, सरकार-CJP में क्या डील हुई?
36 दिनों तक जंतर-मंतर पर डटा आंदोलन, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सरकार के साथ कई दौर की बातचीत और फिर अचानक प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान। आखिर बंद कमरे में क्या तय हुआ कि आंदोलनकारी अपने-अपने घर लौट गए? यह कहानी सिर्फ एक धरने के खत्म होने की नहीं, बल्कि समझौते की मेज तक पहुंचे एक लंबे संघर्ष की है।
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ आंदोलन आखिरकार अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और फिर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान कर दिया गया। कुछ देर पहले तक जहां नारे गूंज रहे थे, वहीं अब प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक घर लौटने की अपील की जाने लगी।
फिर आया वह पल… जिसने पूरे आंदोलन की दिशा बदल दी
संविधान क्लब में हुई बैठक के बाद CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी मांग—शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा—पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही सरकार ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने पर भी सहमति जताई है। CJP का कहना है कि सरकार ने लिखित आश्वासन दिया है और संबंधित दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी भरोसे के आधार पर आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।
सरकार ने क्या वादा किया… और CJP को क्या मिला?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेताओं ने दावा किया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों और संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया है। साथ ही, आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई है। इसके अलावा, परीक्षा व्यवस्था में सुधार से जुड़े पांच बिंदुओं पर आगे भी बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है। दोनों पक्ष चार सप्ताह बाद फिर से बैठक करेंगे, जिसमें व्यापक सुधारों पर चर्चा होगी।
जेपी नड्डा ने भी बताई बैठक की पूरी कहानी
जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच यह तीसरी बैठक थी। उनके मुताबिक CJP अपनी मांगों का लिखित मसौदा लेकर आई थी। लंबी चर्चा के बाद इस बात पर सहमति बनी कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई होगी और जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन्हें लागू किया जाएगा। नड्डा ने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारियों की कई मांगों को स्वीकार किया है और आगे भी संवाद का रास्ता खुला रहेगा।
लेकिन कहानी सिर्फ आंदोलन खत्म होने की नहीं है…
जंतर-मंतर खाली जरूर हो गया है, लेकिन NEET पेपर लीक विवाद अभी खत्म नहीं हुआ। जांच एजेंसियां अब भी मामले की जांच कर रही हैं। परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर उठे सवाल आज भी बरकरार हैं। यही वजह है कि CJP ने भी साफ कर दिया है कि अगर तय समय के भीतर वादे पूरे नहीं हुए, तो आगे की रणनीति पर फिर विचार किया जाएगा।
एक सवाल, जो इस कहानी के बाद भी बाकी है
क्या आंदोलन खत्म होने का मतलब विवाद खत्म होना है? क्या सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन समय पर पूरे होंगे? और सबसे बड़ा सवाल—क्या अब परीक्षा प्रणाली में ऐसा सुधार होगा कि भविष्य में लाखों छात्रों को फिर कभी पेपर लीक जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े?
संवाद से सुलझा बड़ा टकराव
36 दिनों तक चला आंदोलन आखिरकार बातचीत की मेज पर खत्म हुआ। एक तरफ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, दूसरी तरफ सरकार की ओर से आश्वासन और फिर आंदोलन वापस लेने का फैसला। यह घटनाक्रम बताता है कि लोकतंत्र में टकराव का अंतिम रास्ता संवाद ही होता है। हालांकि असली परीक्षा अभी बाकी है। अब देश की नजर इस बात पर रहेगी कि समझौते की मेज पर किए गए वादे जमीन पर कब और कैसे पूरे होते हैं।



