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‘कानूनी कॉकरोच एक साथ आ गए तो क्या होगा?’ BCI के फैसले पर अभिजीत दिपके का तंज

NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट विवाद ने कानूनी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने बार काउंसिल के फैसले पर तीखा तंज कसते हुए ‘कानूनी कॉकरोच’ के एकजुट होने की बात कही।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अगर सभी ‘कानूनी कॉकरोच’ एक साथ आ जाएं तो क्या होगा। उनका यह बयान उस विवाद के बीच आया, जिसमें NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। छात्रों के एक समूह ने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर CJI जस्टिस सूर्यकांत को बुलाए जाने का विरोध किया था। इसी मामले को लेकर BCI ने पहले सख्त रुख अपनाया था।

CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाने का हुआ विरोध

मामला NALSAR यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। विश्वविद्यालय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। कुछ छात्रों ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए अभियान चलाया। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी और 2026 बैच के छात्रों के अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट पर रोक लगाने की बात कही थी।

BCI ने बाद में वापस लिया शुरुआती आदेश

मामले में विवाद बढ़ने के बाद BCI ने अपने शुरुआती फैसले से पीछे हटते हुए 2026 बैच के छात्रों पर सामूहिक एनरोलमेंट रोक को वापस ले लिया। परिषद ने कहा कि अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और उन्हें ऐसी स्थिति का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। इसके बाद NALSAR के 2026 बैच के सभी स्नातकों के लिए संबंधित स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट का रास्ता साफ हो गया।

CJP ने फैसले को बताया अनुचित

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी BCI के शुरुआती आदेश पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि किसी औपचारिक निमंत्रण से असहमति जताने के कारण छात्रों के पूरे बैच को सामूहिक रूप से दंडित करना अनुचित है। उन्होंने इस कार्रवाई को चिंता का विषय बताते हुए संगठन की ओर से इसकी आलोचना की।

विवाद के बीच अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस

NALSAR विवाद ने छात्रों के विरोध, बार काउंसिल की शक्तियों और कानून के विद्यार्थियों के अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। शुरुआती आदेश में पूरे बैच के एनरोलमेंट पर रोक की बात सामने आने के बाद इसकी व्यापक आलोचना हुई। बाद में BCI के फैसले में बदलाव ने विवाद को कुछ हद तक शांत किया, लेकिन छात्रों के विरोध और पेशेवर नियामक संस्थाओं की भूमिका को लेकर सवाल अभी भी चर्चा में हैं।

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