बच्चा पढ़ाई से भाग नहीं रहा, हो सकता है डर रहा हो! इन 3 संकेतों से समझें परेशानी
अगर आपका बच्चा पढ़ाई से बचता है और आपको लगता है कि वह सिर्फ बहाने बना रहा है, तो थोड़ा ठहरकर उसकी परेशानी समझने की कोशिश करें। एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ व्यवहार इस बात का संकेत हो सकते हैं कि बच्चा पढ़ाई को लेकर तनाव, दबाव या डर महसूस कर रहा है। ऐसे में डांट के बजाय समझ जरूरी है।
पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार, अगर बच्चा पढ़ने बैठता है लेकिन कुछ ही मिनटों बाद बार-बार उठने लगे, तो इसे सिर्फ आलस नहीं समझना चाहिए। पानी पीने, फोन देखने या किसी दूसरे काम का बहाना बनाकर पढ़ाई से हटना इस बात का संकेत हो सकता है कि बच्चा पढ़ाई को लेकर असहज या तनाव में है।
पढ़ाई का नाम सुनते ही गुस्सा
दूसरा संकेत यह है कि पढ़ाई की बात होते ही बच्चा गुस्सा या झुंझलाहट दिखाने लगे। अगर सामान्य बातचीत के दौरान भी पढ़ाई का जिक्र होते ही उसका व्यवहार बदल जाता है, तो इसके पीछे मानसिक दबाव या असफल होने का डर हो सकता है। ऐसे व्यवहार को केवल बदतमीजी या अनुशासन की कमी मानना सही नहीं होगा।
बार-बार कहे, ‘मेरा मन नहीं लग रहा’
तीसरा संकेत तब दिखाई देता है जब बच्चा बार-बार कहे कि उसका मन नहीं लग रहा या उससे कुछ नहीं होगा। एक्सपर्ट के मुताबिक इसे केवल मोटिवेशन की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार ऐसी बातें बच्चे के भीतर मौजूद पढ़ाई के तनाव, आत्मविश्वास की कमी या असफलता के डर को दिखाती हैं।
डांटने के बजाय बच्चे की बात सुनें
ऐसी स्थिति में माता-पिता को तुरंत डांटने या सलाह देने के बजाय बच्चे से शांत होकर बात करनी चाहिए। उससे प्यार से पूछा जा सकता है कि पढ़ाई में उसे सबसे ज्यादा मुश्किल किस चीज में महसूस हो रही है। कई बार बच्चे को तुरंत समाधान से ज्यादा जरूरत ऐसे व्यक्ति की होती है, जो बिना जज किए उसकी बात सुने।
बच्चे को सिर्फ बहाना बनाने वाला न समझें
पेरेंटिंग कोच की सलाह है कि माता-पिता पहले से यह धारणा न बनाएं कि बच्चा पढ़ाई से बचने के लिए बहाने कर रहा है। बातचीत तब करें जब माता-पिता और बच्चा दोनों शांत हों। बातचीत का उद्देश्य डांटना नहीं, बल्कि परेशानी की वजह समझना होना चाहिए।
जरूरत पड़े तो टीचर या काउंसलर से लें मदद
अगर बातचीत के बावजूद बच्चे की परेशानी समझ नहीं आ रही है या उसका तनाव लगातार बना हुआ है, तो उसके टीचर या काउंसलर से बात की जा सकती है। बच्चे को यह महसूस कराना जरूरी है कि वह अकेला नहीं है और पढ़ाई से जुड़ी मुश्किलों पर परिवार उसके साथ खड़ा है। ऐसे समय में डांट से ज्यादा प्यार, समझ और सहयोग की जरूरत होती है।



