छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ जिला कोर्ट भर्ती पर विवाद, 10 जिलों में एक ही पद के लिए अलग-अलग नियमों पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के जिला न्यायालयों में तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर विवाद गहरा गया है। रायपुर और राजनांदगांव में शॉर्टलिस्टिंग का नियम लागू है, जबकि अन्य जिलों में सभी पात्र अभ्यर्थियों को परीक्षा का मौका मिलेगा।

छत्तीसगढ़ के जिला न्यायालयों में तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया नए विवाद में घिर गई है। एक ही राज्य और एक जैसे पदों के लिए अलग-अलग जिलों में अलग चयन नियम लागू किए जाने पर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। कुछ जिलों में सभी पात्र उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा का अवसर दिया जा रहा है, जबकि रायपुर और राजनांदगांव में पहले शैक्षणिक मेरिट के आधार पर सीमित अभ्यर्थियों को ही परीक्षा में शामिल किया जाएगा। इसे लेकर उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में समानता की मांग कर रहे हैं।

10 जिलों में निकली भर्ती, लेकिन नियम अलग-अलग

प्रदेश के दस जिला न्यायालयों में सहायक ग्रेड-3 और हिंदी स्टेनोग्राफर के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।

हालांकि भर्ती विज्ञापनों में सामने आए नियमों ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है। रायपुर और राजनांदगांव में अपनाई गई चयन प्रक्रिया अन्य आठ जिलों से अलग होने के कारण विवाद का विषय बन गई है।

दो जिलों में पहले होगी मेरिट के आधार पर छंटनी

रायपुर और राजनांदगांव जिला न्यायालयों में आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों को सीधे लिखित परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा।

यहां स्नातक परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी और रिक्त पदों की संख्या के मुकाबले केवल 15 गुना अभ्यर्थियों को ही आगे की लिखित एवं कौशल परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा।

आठ जिलों में सभी उम्मीदवारों को मिलेगा मौका

इसके विपरीत दुर्ग, बिलासपुर, बलौदाबाजार, बलरामपुर, कबीरधाम, कोरबा, मुंगेली और कांकेर में अलग व्यवस्था लागू की गई है।

इन जिलों में पात्रता पूरी करने वाले सभी अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देने की अनुमति होगी। अंतिम चयन लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षण में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

रायपुर में सबसे अधिक पदों पर भर्ती

रायपुर जिला न्यायालय में कुल 81 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। यहां बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना को देखते हुए पहले शैक्षणिक मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों की संख्या सीमित करने का प्रावधान रखा गया है। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा।

उम्मीदवारों ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल

भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों का कहना है कि जब पद, योग्यता और राज्य एक ही है तो चयन के नियम भी समान होने चाहिए।

उनका तर्क है कि अलग-अलग जिलों में अलग प्रक्रिया अपनाने से समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है और कई योग्य उम्मीदवार शुरुआती चरण में ही बाहर हो सकते हैं।

सिर्फ अंक नहीं, प्रतिभा भी होनी चाहिए आधार

अभ्यर्थियों का कहना है कि स्नातक परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने वाला उम्मीदवार भी लिखित परीक्षा और कौशल परीक्षण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

यदि उसे परीक्षा देने का अवसर ही नहीं मिलेगा तो उसकी वास्तविक क्षमता सामने नहीं आ पाएगी। इसलिए केवल शैक्षणिक अंकों के आधार पर प्रारंभिक छंटनी को कई उम्मीदवार उचित नहीं मान रहे हैं।

एकरूप नीति लागू करने की मांग

उम्मीदवारों ने मांग की है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में एक समान नियम लागू किए जाएं ताकि किसी भी जिले के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा न हो।

उनका कहना है कि या तो सभी जिलों में शॉर्टलिस्टिंग की व्यवस्था लागू की जाए या फिर पूरे राज्य में सभी पात्र उम्मीदवारों को परीक्षा देने का समान अवसर दिया जाए।

भर्ती प्रक्रिया पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर

फिलहाल भर्ती प्रक्रिया जारी है, लेकिन अलग-अलग नियमों को लेकर उठे सवालों ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है। अब उम्मीदवारों की निगाह इस बात पर है कि संबंधित जिला न्यायालय या उच्च न्यायालय प्रशासन इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण या संशोधन जारी करता है या नहीं। यदि नियमों में बदलाव नहीं होता, तो भर्ती प्रक्रिया को लेकर विरोध और कानूनी चुनौती भी सामने आ सकती है।

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