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Russia-India Defence: भारत के स्वदेशी टैंक प्रोग्राम पर रूस का दांव, T-90MS के संयुक्त उत्पादन का दिया प्रस्ताव

यूक्रेन युद्ध के अनुभवों के बीच रूस अब भारत के साथ रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है। भारत जहां फ्यूचर रेडी कॉम्बैट व्हीकल (FRCV) और फ्यूचर मेन बैटल टैंक (FMBT) जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों पर तेजी से काम कर रहा है, वहीं रूस ने एडवांस्ड T-90MS टैंक के संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव देकर दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की पहल की है।

भारत अपनी सेना के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए FRCV और FMBT कार्यक्रमों के तहत आधुनिक स्वदेशी टैंक विकसित कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य विदेशी निर्भरता कम करना और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना है।

इसी रणनीति को देखते हुए रूस ने भारत के सामने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसमें संयुक्त उत्पादन के साथ तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) पर भी जोर दिया गया है।

T-90MS टैंक के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव

रूस की सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत को एडवांस्ड T-90MS मेन बैटल टैंक के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया है।

रूस का कहना है कि यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच पिछले 25 वर्षों से चल रहे T-90 उत्पादन सहयोग को अगले स्तर पर ले जा सकता है और भारतीय सेना को आधुनिक तकनीक से लैस टैंक उपलब्ध करा सकता है।

भारतीय सेना के लिए क्यों अहम है यह प्रस्ताव?

भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े की रीढ़ आज भी रूसी मूल के T-72 ‘अजेय’ और T-90S ‘भीष्म’ टैंक हैं।

ऐसे में रूस का मानना है कि मौजूदा प्लेटफॉर्म को आधुनिक तकनीक के साथ अपग्रेड करना पूरी तरह नए सिस्टम विकसित करने की तुलना में कम जोखिम वाला और तेज विकल्प हो सकता है।

T-90MS में क्या हैं खास खूबियां?

रूस के प्रस्तावित T-90MS टैंक में 1,130 हॉर्सपावर का इंजन, नया डिजाइन वाला टर्रेट, बेहतर आर्मर सुरक्षा, आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम, उन्नत थर्मल इमेजिंग और डिजिटल बैटलफील्ड मैनेजमेंट सिस्टम जैसी कई नई तकनीकें शामिल हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य युद्ध के मैदान में टैंक की मारक क्षमता, सुरक्षा और ऑपरेशनल प्रदर्शन को बेहतर बनाना है।

‘मेक इन इंडिया’ के अनुरूप पेशकश

रूस ने केवल तैयार टैंक बेचने के बजाय भारत में स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का विकल्प दिया है।

यह प्रस्ताव भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप माना जा रहा है, क्योंकि इससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

यूक्रेन युद्ध के बाद बदला रूस का नजरिया

यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी टैंकों के प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठे थे। ऐसे समय में रूस अपने रक्षा उत्पादों को नए बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर ज्यादा जोर दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का स्वदेशी टैंक कार्यक्रम अपनी गति से आगे बढ़ेगा, लेकिन रूस का यह प्रस्ताव भविष्य में दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई दिशा दे सकता है।

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