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राफेल की ताबड़तोड़ डिलीवरी की तैयारी! 208 लड़ाकू विमानों का ऑर्डर, अब नए एंटी-ड्रोन सिस्टम से होगा और घातक

फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने राफेल लड़ाकू विमान की डिलीवरी तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी के पास फिलहाल 208 राफेल विमानों के ऑर्डर लंबित हैं और साल 2026 के अंत तक रिकॉर्ड संख्या में विमान सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच राफेल को नए एंटी-ड्रोन हथियार सिस्टम से भी लैस किया जा रहा है, जिससे आधुनिक युद्धक्षेत्र में इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाएगी।

डसॉल्ट एविएशन ने 2026 की पहली छमाही में 12 राफेल लड़ाकू विमान ग्राहकों को सौंप दिए हैं। इनमें दो विमान फ्रांस को जबकि 10 विमान विदेशी ग्राहकों को दिए गए। कंपनी ने संकेत दिया है कि वर्ष समाप्त होने से पहले 16 और राफेल की डिलीवरी की जाएगी। ऐसा होने पर 2025 में की गई 26 विमानों की डिलीवरी का रिकॉर्ड भी पीछे छूट जाएगा।

208 विमानों के ऑर्डर से फुल स्पीड पर प्रोडक्शन

जून 2026 के अंत तक डसॉल्ट एविएशन के पास 208 राफेल विमानों के ऑर्डर लंबित थे। इतनी बड़ी ऑर्डर बुक कंपनी को आने वाले वर्षों तक लगातार उत्पादन जारी रखने का मजबूत आधार देती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई देश राफेल खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

भारत समेत कई देशों की नजर राफेल पर

भारत 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद को लेकर फ्रांस के साथ बातचीत कर रहा है। यदि यह समझौता होता है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े राफेल सौदों में से एक होगा। इसके अलावा इराक ने भी राफेल में रुचि दिखाई है, जबकि यूक्रेन ने हाल ही में 16 राफेल खरीदने के लिए फ्रांस सरकार के साथ समझौता किया है। इससे राफेल की वैश्विक मांग लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

अब नए एंटी-ड्रोन हथियार से होगा लैस

फ्रांस ने राफेल के साथ नए 68 मिमी गाइडेड रॉकेट का सफल एकीकरण पूरा कर लिया है। यह हथियार विशेष रूप से ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन (घूमते हुए हमला करने वाले हथियार) और कम लागत वाले हवाई खतरों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया गया है। परीक्षण सफल होने के बाद अब इसे राफेल की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कम लागत में ज्यादा प्रभावी हमला

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 68 मिमी गाइडेड रॉकेट पारंपरिक महंगी मिसाइलों की तुलना में काफी कम लागत वाला विकल्प है। ऐसे मिशनों में, जहां महंगे हथियारों की आवश्यकता नहीं होती, वहां यह रॉकेट अधिक किफायती और प्रभावी साबित हो सकता है। इससे वायुसेना को छोटे और मध्यम दूरी के हवाई खतरों से निपटने के लिए एक अतिरिक्त हथियार विकल्प मिलेगा।

राफेल क्यों बना दुनिया की पसंद?

राफेल को मल्टी-रोल फाइटर जेट माना जाता है, जो हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री अभियानों को एक साथ अंजाम देने में सक्षम है। आधुनिक रडार, अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और लगातार जोड़े जा रहे नए हथियार इसे दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में शामिल करते हैं। यही वजह है कि एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के कई देश इसकी खरीद में रुचि दिखा रहे हैं।

बढ़ती मांग से बदलेगा वैश्विक रक्षा बाजार

राफेल की बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि आधुनिक युद्ध में ऐसे लड़ाकू विमानों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है, जो बदलते खतरों के अनुसार खुद को लगातार अपग्रेड कर सकें। नए एंटी-ड्रोन सिस्टम और बड़ी ऑर्डर बुक के साथ डसॉल्ट एविएशन अब उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि भारत का 114 राफेल विमानों का संभावित सौदा भी अंतिम रूप लेता है, तो यह कंपनी और भारतीय वायुसेना—दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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