क्या होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका कर सकता है कब्जे का दावा? ट्रंप के बयान की समझिए पूरी हकीकत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी क्षेत्र बनाने के दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका किसी दूसरे देश के समुद्री इलाके को अपनी जमीन घोषित कर सकता है? अंतरराष्ट्रीय कानून इसकी इजाजत नहीं देता।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में है। ट्रंप ने ईरान को हराने के बाद इस अहम समुद्री रास्ते को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात कही है। लेकिन रणनीतिक महत्व रखने वाले इस जलमार्ग की कानूनी स्थिति कुछ और है। होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है और इसकी संप्रभुता से जुड़े अधिकार इन्हीं तटीय देशों के पास हैं। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल और LNG की आवाजाही पर निर्भर है। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में ट्रंप का बयान केवल क्षेत्रीय राजनीति नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा करता है।
होर्मुज स्ट्रेट आखिर किसके अधिकार में है?
होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसका उत्तरी हिस्सा ईरान से और दक्षिणी क्षेत्र ओमान से जुड़ा है। सबसे संकरे स्थान पर इसकी चौड़ाई करीब 34 किलोमीटर है। भौगोलिक और कानूनी तौर पर यह अमेरिका का क्षेत्र नहीं है। यहां तटीय देशों के अधिकार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत तय होते हैं।
UNCLOS अमेरिका के दावे पर क्या कहता है?
समुद्री क्षेत्रों से जुड़े अधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि यानी UNCLOS को अहम अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था माना जाता है। इसके तहत किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से दूसरे देशों के जहाजों को गुजरने का अधिकार मिलता है, लेकिन इससे तटीय देशों की संप्रभुता खत्म नहीं होती। यानी अमेरिका सिर्फ अपने ऐलान के आधार पर होर्मुज को अपनी सीमा में शामिल नहीं कर सकता।
ट्रांजिट पैसेज का भी है अधिकार
UNCLOS के तहत अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से जहाजों के ट्रांजिट पैसेज का अधिकार महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि दूसरे देशों के व्यापारिक और सैन्य जहाज नियमों के तहत यहां से गुजर सकते हैं। यही वजह है कि होर्मुज को किसी एक बाहरी देश के नियंत्रण में देने का दावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था के लिहाज से बेहद जटिल होगा।
फिर ट्रंप के बयान का मतलब क्या है?
ट्रंप का बयान कानूनी घोषणा से ज्यादा रणनीतिक और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है। ईरान के साथ तनाव और समुद्री आवाजाही पर दबाव के बीच अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी ताकत और प्रभाव दिखाना चाहता है। ऐसे में होर्मुज पर नियंत्रण की बात युद्धकालीन दबाव की राजनीति का हिस्सा हो सकती है।
दुनिया के लिए होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों?
होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और LNG एशियाई बाजारों तक पहुंचता है। इस रास्ते पर तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालिया तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी इसका संकेत भी दे रही है।
भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया से आने वाले तेल और गैस पर काफी निर्भर है। इसलिए होर्मुज में लंबे समय तक अस्थिरता रहने से आयात लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर महंगाई और परिवहन लागत तक दिखाई दे सकता है। यही कारण है कि ट्रंप का बयान अमेरिका-ईरान विवाद से आगे बढ़कर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला बन गया है।



