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Silver Import: सरकारी पाबंदियों का असर, भारत में चांदी का आयात तेजी से घटा, बाजार में बढ़ी चिंता

सरकार की नई लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू होने के बाद भारत में चांदी के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आयात कम होने से घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जबकि मांग लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले त्योहार और शादी-ब्याह का सीजन बाजार की चुनौतियों को और बढ़ा सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मई 2026 में चांदी के आयात के लिए नई लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद से आयात की रफ्तार में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट और कंसल्टेंसी मेटल्स फोकस के अनुसार, जून 2026 में भारत में चांदी का आयात घटकर लगभग 29 टन रह गया, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 747 टन था। जून का आयात देश की अनुमानित वार्षिक चांदी की मांग के एक प्रतिशत से भी कम माना गया है।

सप्लाई घटी, प्रीमियम कई वर्षों के उच्च स्तर पर

आयात कम होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई देने लगा है। चांदी की उपलब्धता घटने से खरीदारों को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

मेटल्स फोकस के प्रिंसिपल कंसल्टेंट हर्षल बारोट के अनुसार, सीमित सप्लाई के कारण 30 दिन का औसत प्रीमियम कम से कम 2019 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यानी खरीदारों को बाजार में चांदी हासिल करने के लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है।

बैंकों को अब भी लाइसेंस मिलने का इंतजार

रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकांश बैंक और अधिकृत आयातक अभी तक चांदी आयात करने के लिए जरूरी सरकारी अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। केवल कुछ संस्थानों को ही लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिसके कारण बाजार में पर्याप्त सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ताओं में शामिल है। आभूषण, चांदी के बर्तन, औद्योगिक उपयोग, धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। चूंकि देश में घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है, इसलिए बाजार मुख्य रूप से आयात पर निर्भर करता है।

व्यापारियों में बढ़ी अनिश्चितता

नई लाइसेंसिंग व्यवस्था ने कारोबारियों के सामने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया, आयात कोटा और उसकी सीमा को लेकर अभी पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, आयात लाइसेंस मंजूर करने वाली समिति महीने में केवल एक या दो बार बैठक करती है। इससे अनुमति मिलने में देरी हो रही है। वहीं अब सरकार ने सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) भी अनिवार्य कर दिया है, जिससे प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई है।

क्यों लागू की गई नई व्यवस्था?

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वाले देशों, विशेष रूप से थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से बढ़ते चांदी आयात को नियंत्रित करना है। वर्तमान में चांदी को ‘प्रतिबंधित आयात’ (Restricted Import) श्रेणी में रखा गया है और हर आयात अनुरोध पर निर्धारित नियमों के अनुसार फैसला लिया जा रहा है।

आयात शुल्क बढ़ने के बाद और सख्त हुई नीति

नई लाइसेंसिंग व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सोना और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने के फैसले के बाद लागू की गई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई से शुरू होने वाली त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन की खरीदारी के दौरान यदि आयात सामान्य स्तर पर नहीं पहुंचा, तो घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में ज्वैलर्स और कारोबारियों की चिंता आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है।

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