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UP, बिहार और मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़े लोन लेने वाले, CIBIL रिपोर्ट में बड़ा खुलासा; दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घटी

भारत में पिछले नौ वर्षों में बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से औपचारिक कर्ज (Formal Credit) लेने वालों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। TransUnion CIBIL की नई रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में क्रेडिट लेने वालों की वृद्धि पारंपरिक रूप से मजबूत माने जाने वाले दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों से तेज रही है। रिपोर्ट में महिलाओं, युवाओं और गैर-मेट्रो शहरों की बढ़ती भागीदारी को भी प्रमुख बदलाव बताया गया है।

TransUnion CIBIL की रिपोर्ट ‘Unlocking Access: Journey to Credit Expansion in India’ के अनुसार, वर्ष 2017 में देश की क्रेडिट-योग्य आबादी 79 करोड़ थी, जो 2026 तक बढ़कर 89 करोड़ हो गई।

इसी अवधि में कम से कम एक बार बैंक, एनबीएफसी या अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेने वाले लोगों की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 74 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह दर्शाता है कि डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के विस्तार से औपचारिक कर्ज तक लोगों की पहुंच काफी आसान हुई है।

UP, बिहार और मध्य प्रदेश ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार

रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2026 के बीच उत्तर और मध्य भारत में क्रेडिट ग्रोथ सबसे तेज रही।

  • उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8% से बढ़कर 11% हो गई।
  • मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 4% से बढ़कर 6% पहुंची।
  • बिहार में यह आंकड़ा 3% से बढ़कर 5% हो गया।
  • पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी भी 4% से बढ़कर 5% दर्ज की गई।

वहीं, देश के सबसे बड़े क्रेडिट बाजारों में शामिल महाराष्ट्र और तमिलनाडु की हिस्सेदारी में कमी आई। महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 12% से घटकर 10% और तमिलनाडु की 11% से घटकर 9% रह गई।

क्यों बढ़ी औपचारिक कर्ज तक पहुंच?

TransUnion CIBIL के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावेश जैन के अनुसार, पिछले दशक में भारत के क्रेडिट इकोसिस्टम में कई बड़े बदलाव हुए।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, यूपीआई का तेजी से विस्तार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, फिनटेक कंपनियों, एनबीएफसी, बैंकों और नियामकीय सुधारों ने लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेना पहले की तुलना में काफी आसान बना दिया।

पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की मांग सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन सबसे लोकप्रिय श्रेणी बनकर उभरे हैं। मार्च 2017 में जहां 34 प्रतिशत सक्रिय कर्जधारकों के पास इस श्रेणी के उत्पाद थे, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 51 प्रतिशत हो गया। इन उत्पादों का उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या भी नौ वर्षों में लगभग चार गुना बढ़ गई।

बिजनेस लोन में सबसे तेज उछाल

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कारोबार से जुड़े कर्ज की मांग सबसे तेजी से बढ़ी। मार्च 2017 में केवल 3 प्रतिशत सक्रिय कर्जधारकों ने बिजनेस लोन लिया था, जबकि मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 9 प्रतिशत हो गया। इस दौरान बिजनेस लोन लेने वालों की संख्या लगभग 10 गुना बढ़ी, जो सभी श्रेणियों में सबसे तेज वृद्धि रही।

वहीं गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 19% से बढ़कर 22% हुई, जबकि वाहन ऋण और होम लोन जैसी श्रेणियों में अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर्ज की गई।

महिलाओं और छोटे शहरों की बढ़ी भागीदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, अब केवल महानगर ही नहीं बल्कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था तेजी से पहुंच रही है। महिलाओं, युवाओं और गैर-मेट्रो क्षेत्रों से आने वाले ग्राहकों की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन लोन प्रोसेसिंग और वित्तीय समावेशन की योजनाओं ने देश के नए उपभोक्ताओं को औपचारिक क्रेडिट सिस्टम से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे आने वाले वर्षों में भारत के क्रेडिट बाजार के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

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