5 दिन की गिरावट के बाद शेयर बाजार में ‘₹5 लाख करोड़’ की वापसी! सेंसेक्स 776 अंक उछला, निवेशकों की लौटी मुस्कान
लगातार पांच कारोबारी दिनों तक लाल निशान में रहने के बाद सोमवार को शेयर बाजार ने दमदार वापसी की। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने जोरदार छलांग लगाई। इस तेजी से निवेशकों की दौलत में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हो गया।
पिछले सप्ताह लगातार पांच दिन की गिरावट के बाद सोमवार को शेयर बाजार ने राहत की सांस ली। कारोबार शुरू होते ही खरीदारी का जोर देखने को मिला और दिनभर तेजी बनी रही। बीएसई सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02 फीसदी की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 228.50 अंक यानी 0.96 फीसदी चढ़कर 23,995.95 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा उछला था।
निवेशकों की दौलत में ₹5 लाख करोड़ का इजाफा
बाजार की इस तेज रफ्तार का सबसे बड़ा फायदा निवेशकों को मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये बढ़कर लगभग 480 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पांच दिनों की लगातार गिरावट से मायूस निवेशकों के लिए यह कारोबारी दिन किसी राहत भरे तोहफे से कम नहीं रहा। बाजार में चौतरफा खरीदारी ने निवेशकों का भरोसा भी मजबूत किया।
इन शेयरों ने मचाई सबसे ज्यादा धूम
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 बढ़त के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा तेजी इटरनल में 5.63 फीसदी और इंडिगो में 4.77 फीसदी दर्ज की गई। इसके अलावा इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक, सन फार्मा और टीसीएस के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड और एक्सिस बैंक के शेयर मामूली दबाव में रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप ने भी दिखाई ताकत
सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.11 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 1.31 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टरों की बात करें तो आईटी, मीडिया और रियल्टी शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि ऑयल एंड गैस सेक्टर अपेक्षाकृत कमजोर रहा।
कच्चे तेल की कीमतों ने बदला पूरा माहौल
बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट रही। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई रुकने की खबरों से ब्रेंट क्रूड करीब 88.89 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। पिछले सप्ताह यह 100 डॉलर के पार पहुंच गया था। तेल सस्ता होने से भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी, जिसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर दिखा।
रुपया भी हुआ मजबूत
शेयर बाजार में तेजी के साथ भारतीय मुद्रा को भी मजबूती मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया 63 पैसे मजबूत होकर 95.90 पर बंद हुआ। रुपये में आई मजबूती को विदेशी निवेशकों के बेहतर भरोसे और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की बढ़ती भावना का संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या रहेगी बाजार की चाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो घरेलू शेयर बाजार में राहत का माहौल आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।



