पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर साधा निशाना, अमेरिकी दूत ने नहीं दिया साथ; कैमरे के सामने ही ठंडी पड़ गई पूरी कोशिश
आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करता नजर आया। लेकिन अमेरिकी दूत की प्रतिक्रिया ने साफ संकेत दे दिया कि वॉशिंगटन ने भारत पर लगाए गए आरोपों को कोई तवज्जो नहीं दी।
अमेरिका में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब पाकिस्तान के एक पत्रकार ने देश में बढ़ रहे आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए भारत और अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन का नाम जोड़ा। पत्रकार ने अमेरिकी दूत से पूछा कि पाकिस्तान लगातार भारत और तालिबान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है, ऐसे में इस पर अमेरिका का क्या रुख है?
हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधि का जवाब पाकिस्तान की उम्मीदों से बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने अपने पूरे जवाब में भारत का नाम तक नहीं लिया और केवल पाकिस्तान के साथ अमेरिका के आतंकवाद-रोधी सहयोग की बात दोहराई।
अमेरिकी दूत ने क्या कहा?
अमेरिकी दूत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के साथ अमेरिका की साझेदारी मजबूत है और दोनों देश इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तालिबान के साथ केवल उन्हीं मामलों में संवाद करता है, जहां ऐसा करना उसके राष्ट्रीय हित में हो।
गौर करने वाली बात यह रही कि भारत पर लगाए गए आरोपों का उन्होंने न तो समर्थन किया और न ही उनका कोई उल्लेख किया।
पुराना आरोप, लेकिन नहीं मिला अंतरराष्ट्रीय समर्थन
पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठन उसके खिलाफ कर रहे हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद समय-समय पर भारत पर भी इन संगठनों को कथित समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है।
इन्हीं दावों के आधार पर पाकिस्तान कई बार अफगानिस्तान में कथित आतंकी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई भी कर चुका है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी दोहराया वही नैरेटिव
विश्लेषकों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि भारत क्षेत्र में सक्रिय कुछ आतंकी संगठनों को कथित रूप से वित्तीय और रणनीतिक मदद देता है। हालांकि भारत ने ऐसे सभी आरोपों को लगातार खारिज किया है और उन्हें बेबुनियाद बताया है।
इस प्रेस वार्ता में भी पाकिस्तान की ओर से उसी पुराने नैरेटिव को दोहराने की कोशिश दिखाई दी, लेकिन अमेरिकी प्रतिक्रिया ने उस प्रयास को कोई नई वैधता नहीं दी।
भारत का जिक्र तक नहीं, कई संकेत छोड़ गया जवाब
अमेरिकी दूत की प्रतिक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही रहा कि उन्होंने पूरे उत्तर में भारत का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने केवल आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और अमेरिकी हितों की बात की।
भारत के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास
कूटनीतिक हलकों में इसे इस संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से उन आरोपों पर टिप्पणी करने से बचता है, जिनका वह समर्थन नहीं करता। भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों के बीच यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान की उस कोशिश को अपेक्षित समर्थन दिलाने में सफल नहीं दिखी, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास करता रहा है।



