खेती में पंजाब को भी पछाड़ेगा मध्य प्रदेश? CM मोहन यादव का बड़ा लक्ष्य, 100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का प्लान

MP Agriculture News: CM मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली, ऑनलाइन KCC और अन्य सुविधाओं का भी ऐलान।
मध्य प्रदेश सरकार ने खेती और किसान कल्याण को लेकर बड़ा लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर किया जाएगा। फिलहाल राज्य में 60 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि सिंचित होने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने अगले ढाई साल में इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करने की बात कही है।
ग्वालियर में बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें दिन के समय सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने, किसान क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने, कृषक कवच योजना और 200 नए पैक्स कार्यालयों की शुरुआत जैसे कदम शामिल हैं।
100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में वर्तमान में 60 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। सरकार का लक्ष्य अगले ढाई साल में इसे बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाना है। इसके लिए अलग-अलग सिंचाई परियोजनाओं पर तेजी से काम करने की बात कही गई है।
सिंचाई क्षेत्र बढ़ने से किसानों को बारिश पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर किसान एक से अधिक फसल लेने, फसल विविधीकरण और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को बढ़ाने में सक्षम हो सकते हैं।
किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए एक और अहम घोषणा करते हुए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने की बात कही।
उन्होंने कहा कि रात के समय खेतों में सिंचाई करने के दौरान किसानों को कई तरह की परेशानियों और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने से किसानों को सिंचाई करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि मध्य प्रदेश में बिजली की उपलब्धता को देखते हुए कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
किसान क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च
बलराम जयंती के कार्यक्रम में किसानों के लिए ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) पोर्टल भी शुरू किया गया।
इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया को आसान बनाना है। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा से किसानों को बैंकिंग प्रक्रिया के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
शून्य प्रतिशत ब्याज वाले कृषि ऋण में बदलाव
किसानों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण की व्यवस्था को भी सरल बनाने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक अब खरीफ और रबी के कृषि ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता खत्म करने की व्यवस्था की जा रही है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार साल में किसी भी समय ऋण चुका सकेंगे।
इसका उद्देश्य किसानों को ऋण चुकाने में अधिक लचीलापन देना है।
कृषक कवच योजना से किसानों को राहत
कार्यक्रम में कृषक कवच योजना की शुरुआत भी की गई। योजना का उद्देश्य ऐसे किसानों को सरकारी योजनाओं और ऋण व्यवस्था से जोड़ना है, जिनके खाते से जुड़ी जांच या अन्य प्रक्रियाएं लंबित होने के कारण उन्हें लाभ मिलने में परेशानी हो रही है।
सरकार की किसान कल्याण नीति में बैंकिंग और सहकारिता व्यवस्था के माध्यम से किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
200 नए PACS कार्यालय शुरू
ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 200 नए प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS) कार्यालयों का शुभारंभ किया गया।
PACS ग्रामीण स्तर पर किसानों को सहकारी बैंकिंग और कृषि ऋण जैसी सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। नए कार्यालयों के जरिए सहकारी सेवाओं की पहुंच गांवों तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
इसके अलावा अपेक्स बैंक की ग्वालियर संभागीय शाखा की शुरुआत भी की गई।
खेती के साथ एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस पर जोर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि को सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित रखने के बजाय इसे एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस से जोड़ने पर जोर दिया।
सरकार का फोकस खेत से लेकर बाजार और आगे निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर है। इसके तहत कृषि उत्पादों की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बेहतर बाजार संपर्क जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
कृषि में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
उद्यानिकी और पशुपालन से आय बढ़ाने की कोशिश
किसानों को पारंपरिक अनाज की खेती के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि खेती के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। इसी दिशा में उद्यानिकी और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
खेती में पंजाब से आगे निकलने की चुनौती
मध्य प्रदेश लंबे समय से कृषि उत्पादन के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री के 100 लाख हेक्टेयर सिंचाई लक्ष्य के पीछे खेती की उत्पादकता और किसान आय को और बढ़ाने की बड़ी रणनीति है।
सिंचाई का विस्तार होने से मध्य प्रदेश के किसानों को रबी और खरीफ दोनों मौसमों में खेती के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता मिल सकती है। हालांकि, 100 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य हासिल करना बड़े स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रियान्वयन वाला काम है।
किसान कल्याण वर्ष 2026 में कृषि पर फोकस
मध्य प्रदेश सरकार ने 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने पर जोर दिया है। इसके तहत कृषि, सहकारिता, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
बलराम जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को भी इसी व्यापक किसान कल्याण अभियान से जोड़ा गया।
सरकार के सामने अब लक्ष्य को जमीन पर उतारने की चुनौती
100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। इसके लिए नई सिंचाई परियोजनाओं के साथ मौजूदा परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाना, बिजली आपूर्ति मजबूत करना और पानी के बेहतर प्रबंधन की जरूरत होगी।
किसानों के लिए दिन में बिजली, आसान कृषि ऋण, डिजिटल KCC और सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदमों का असर भी इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणाओं से साफ है कि मध्य प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र में सिंचाई, बिजली, कृषि ऋण, सहकारिता और आधुनिक तकनीक को एक साथ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
100 लाख हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य इस रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा है। यदि सरकार तय समयसीमा में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार कर पाती है और किसानों को दिन में बिजली के साथ बेहतर ऋण व बाजार सुविधाएं मिलती हैं, तो मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिल सकती है।



