धर्म

हरियाली तीज पर सिर्फ व्रत नहीं, इन 3 बुरी आदतों को छोड़ने का लें संकल्प; दांपत्य जीवन में आएगी खुशहाली

हरियाली तीज को केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं माना जाता, बल्कि इसे अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ बुरी आदतें छोड़ने का संकल्प शुभ माना जाता है।

श्रावण मास की हरियाली तीज महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं और पति की सुख-समृद्धि तथा दांपत्य जीवन में खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। लेकिन धार्मिक परंपराओं में इस पर्व का अर्थ केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। मान्यता है कि व्यक्ति के आचरण और सोच में सकारात्मक बदलाव भी पूजा का अहम हिस्सा हैं।

इसी वजह से हरियाली तीज पर कुछ ऐसे संकल्प लेने की परंपरा बताई गई है, जो रिश्तों में विश्वास और मन में शांति बढ़ाने से जुड़े हैं। विशेष रूप से छल-कपट, झूठ और दूसरों की निंदा जैसी आदतों से दूरी बनाने का संकल्प लेने की बात कही जाती है।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन महीने की तृतीया तिथि पर माता पार्वती ने तीज माता के रूप में भक्तों को दर्शन दिए थे। इसी स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना के साथ व्रत रखती हैं। श्रद्धा और नियम के साथ किया गया पूजन इस पर्व का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।

पहला संकल्प- रिश्ते में छल-कपट से बचें

हरियाली तीज पर पति-पत्नी के रिश्ते में ईमानदारी बनाए रखने का संकल्प लेने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक दृष्टि से छल या धोखे को रिश्ते की मजबूती के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसलिए इस दिन मन में यह संकल्प लिया जा सकता है कि वैवाहिक जीवन में विश्वास और पारदर्शिता को प्राथमिकता देंगे।

दूसरा संकल्प- झूठ और दुर्व्यवहार से बनाएं दूरी

झूठ बोलना और दूसरों के साथ गलत व्यवहार करना ऐसी आदतें हैं, जो रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती हैं। हरियाली तीज के अवसर पर इनसे बचने का संकल्प लेने की सलाह दी जाती है। परिवार के सदस्यों से सम्मान और प्रेम के साथ बातचीत करना इस पर्व के सकारात्मक संदेश से जोड़ा जाता है।

तीसरा संकल्प- परनिंदा छोड़ने की कोशिश करें

दूसरों की बुराई या पीठ पीछे निंदा करना भी उन आदतों में शामिल है, जिन्हें इस पर्व पर छोड़ने का संकल्प लेने की बात कही जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखना आध्यात्मिक शांति के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए इस दिन सकारात्मक सोच अपनाने और दूसरों के प्रति सम्मान रखने का संकल्प लिया जा सकता है।

पूजा के साथ व्यवहार में बदलाव भी जरूरी

हरियाली तीज का संदेश केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है। इस पर्व को आत्मचिंतन और खुद में सुधार का अवसर भी माना जाता है। क्रोध पर नियंत्रण, परिवार के साथ प्रेमपूर्ण संवाद, जरूरतमंद की सहायता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी जैसे छोटे प्रयास जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे संकल्प श्रद्धा को व्यवहार से जोड़ते हैं और पर्व के महत्व को और गहरा बनाते हैं।

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