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‘चक दे! इंडिया’ का वो फाइनल जिसे बनाने में लगीं 15 रातें, मैदान पर महीनों पसीना बहाती थीं एक्ट्रेसेस

शाहरुख खान की ‘चक दे! इंडिया’ को भले ही रिलीज हुए 19 साल हो गए हों, लेकिन फिल्म का हॉकी फाइनल आज भी दर्शकों को रोमांचित करता है। अब विद्या मालवडे ने बताया है कि पर्दे पर दिखा यह मुकाबला असल में कितनी लंबी तैयारी और मेहनत से बना था।

शाहरुख खान की ‘चक दे! इंडिया’ भारतीय सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल है, जिनका असर रिलीज के वर्षों बाद भी कायम है। फिल्म की कहानी, कलाकारों की परफॉर्मेंस और भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत का सफर दर्शकों को आज भी याद है। फिल्म में कप्तान विद्या शर्मा का किरदार निभाने वाली विद्या मालवडे ने अब इससे जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो फिल्म के फाइनल मैच को लेकर उत्सुकता बढ़ाता है। अभिनेत्री ने बताया कि स्क्रीन पर कुछ मिनटों में दिखाई देने वाले इस रोमांचक मुकाबले के पीछे लंबी तैयारी और लगातार शूटिंग शामिल थी। उनके मुताबिक क्लाइमैक्स की शूटिंग आसान नहीं थी और टीम को इसके लिए कई रातों तक मैदान में काम करना पड़ा। इस दौरान कलाकारों ने सिर्फ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि हॉकी को समझने और उसे कैमरे के सामने सही तरीके से पेश करने पर भी काफी मेहनत की।

19 साल बाद फिर याद आया फिल्म का सफर

विद्या मालवडे ने फिल्म की 19वीं सालगिरह के मौके पर सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने बताया कि इतने वर्षों बाद भी दर्शक उन्हें उनके फिल्मी किरदार विद्या शर्मा के नाम से पहचानते हैं, जो उनके लिए बेहद भावुक और खास अनुभव है। अभिनेत्री ने इस प्यार को अपने माता-पिता के आशीर्वाद, मेहनत और दर्शकों के स्नेह से जोड़ा। उन्होंने कहा कि फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए किसी खास सौभाग्य से कम नहीं रहा और इतने समय बाद भी लोगों का जुड़ाव इस फिल्म के साथ बना हुआ है।

कैमरे के सामने आने से पहले सीखी हॉकी

विद्या के मुताबिक फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले कलाकारों को हॉकी की गंभीर ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा था। महिला खिलाड़ियों का किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियों ने लगभग एक साल तक इस खेल का अभ्यास किया। उन्हें मैदान पर अलग-अलग रणनीतियां और सेट प्ले समझाए जाते थे, ताकि मैच के दृश्य बनावटी न लगें। शूटिंग के दौरान भी अभ्यास लगातार जारी रहता था। कई बार जिस अभिनेत्री का उस दिन कोई सीन नहीं होता था, वह भी मैदान में मौजूद रहकर बाकी कलाकारों के साथ ट्रेनिंग करती थी। इस तैयारी का मकसद साफ था कि पर्दे पर हॉकी खेलती हुई टीम वास्तविक खिलाड़ियों जैसी नजर आए।

छह महीने चली फिल्म की शूटिंग

एक लंबे ट्रेनिंग दौर के बाद फिल्म की शूटिंग लगभग छह महीने तक चली। विद्या ने बताया कि कलाकारों को कैमरे की मौजूदगी से ज्यादा अपने खेल और किरदार पर ध्यान देने के लिए तैयार किया गया था। उन्हें कई बार यह तक नहीं पता होता था कि मैदान में कैमरे किस दिशा में लगाए गए हैं। इससे कलाकार स्वाभाविक तरीके से खेलते हुए दिखाई दे सकें और मैच के दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज वास्तविक लगे।

फाइनल मैच के लिए ऑस्ट्रेलिया में डाला गया डेरा

फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यानी फाइनल हॉकी मुकाबला शूट करने के लिए पूरी टीम लगभग छह सप्ताह ऑस्ट्रेलिया में रही। यहां अलग-अलग महिला हॉकी खिलाड़ियों ने भी शूटिंग में हिस्सा लिया। फाइनल मैच को पर्दे पर विश्वसनीय और रोमांचक दिखाने के लिए रात में शूटिंग का लंबा सिलसिला चला। विद्या के अनुसार इस एक मुकाबले को फिल्माने में करीब 15 रातें लग गईं। यानी दर्शकों को जो मैच कुछ समय में पूरा होता दिखाई देता है, उसे तैयार करने के पीछे कई रातों की मेहनत लगी थी।

स्क्रीन की टीम बनी असल जिंदगी की दोस्ती

‘चक दे! इंडिया’ में महिला हॉकी टीम की 16 खिलाड़ियों के बीच जिस तरह की दोस्ती और टीम भावना दिखाई गई थी, वह केवल अभिनय तक सीमित नहीं रही। विद्या के मुताबिक फिल्म खत्म होने के वर्षों बाद भी उस दौर की कई अभिनेत्रियों के बीच मजबूत दोस्ती कायम है। यही वजह है कि फिल्म की टीम के लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक फिल्म की शूटिंग नहीं, बल्कि जिंदगी का यादगार अनुभव बन गया।

इसलिए आज भी खास है ‘चक दे! इंडिया’

फिल्म को रिलीज हुए करीब दो दशक होने वाले हैं, लेकिन इसकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई। हॉकी, टीमवर्क और संघर्ष की कहानी ने इसे भारतीय स्पोर्ट्स सिनेमा की यादगार फिल्मों में जगह दिलाई। अब विद्या मालवडे की बातों से यह भी सामने आया है कि पर्दे पर दिखने वाला वह शानदार फाइनल मैच सिर्फ अभिनय का नतीजा नहीं था, बल्कि महीनों की ट्रेनिंग और 15 रातों की कड़ी शूटिंग के बाद तैयार हुआ था।

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