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अगस्त में महंगाई बढ़कर 4.82%, अब RBI के सामने बड़ा फैसला; 7 अक्टूबर को रेपो रेट पर नजर

खाद्य महंगाई 5.95% और थोक महंगाई 9.92% पहुंची; बढ़ती कीमतों के बीच RBI की अक्टूबर MPC बैठक पर बाजार की नजर।

अजय विक्रम सिंह

नई दिल्ली: देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.82% पहुंच गई, जो जुलाई के 4.45% के मुकाबले काफी अधिक है। खाद्य कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह रही। महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद अब बाजार की नजर 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली RBI की Monetary Policy Committee (MPC) बैठक पर टिक गई है।

अगस्त के आंकड़े RBI के 4% के मध्यम अवधि के महंगाई लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर रहे हैं। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% की निर्धारित सहनशीलता सीमा के भीतर है।

अगस्त में क्यों बढ़ी महंगाई?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में Food Inflation बढ़कर 5.95% हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.52% थी। कमजोर और अनियमित मानसून के कारण कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ा। अदरक, प्याज और लहसुन जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी भी महंगाई बढ़ने की वजह बनी।

इसके अलावा ईंधन और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी महंगाई के जोखिम को बढ़ाया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 85% आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

RBI के लिए बढ़ी चुनौती

महंगाई बढ़ने से RBI के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे कीमतों को नियंत्रित रखना है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है।

RBI ने अगस्त की बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा था। लेकिन पिछली MPC बैठक के मिनट्स में संकेत मिला था कि अगर महंगाई का दबाव अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों में फैलता है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है।

7 अक्टूबर को क्या करेगा RBI?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7 अक्टूबर को RBI रेपो रेट बढ़ाएगा या फिर मौजूदा दर पर ही कायम रहेगा?

अगस्त के 4.82% CPI आंकड़े और लगभग 10% के आसपास पहुंच चुकी थोक महंगाई RBI के लिए चिंता बढ़ा सकती है। अगस्त में Wholesale Price Inflation यानी WPI 9.92% रही, जो जुलाई के 9.78% से भी ज्यादा है। थोक खाद्य कीमतों और ईंधन की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि अक्टूबर में RBI निश्चित तौर पर ब्याज दर बढ़ाएगा। केंद्रीय बैंक महंगाई के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि, वैश्विक बाजार, कच्चे तेल और रुपये की स्थिति समेत कई पहलुओं को देखेगा।

होम लोन और कार लोन पर क्या होगा असर?

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर होम लोन, कार लोन और अन्य floating-rate loans की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।

वहीं, अगर RBI महंगाई बढ़ने के बावजूद रेपो रेट को स्थिर रखता है, तो कर्ज लेने वालों को तत्काल राहत मिल सकती है। इसलिए अक्टूबर की MPC बैठक आम उपभोक्ताओं, कारोबारियों और निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

Core Inflation भी बढ़ी

सिर्फ खाद्य और ईंधन कीमतों को हटाकर देखी जाने वाली Core Inflation भी अगस्त में बढ़कर करीब 4.2% रही। यह संकेत देता है कि महंगाई का दबाव केवल खाद्य कीमतों तक सीमित नहीं है।

अगर कोर महंगाई भी लगातार ऊपर जाती है, तो RBI के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला और मुश्किल हो सकता है।

बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर

अगस्त की महंगाई रिपोर्ट के बाद वित्तीय बाजारों में RBI की आगामी नीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पहले जहां ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद मजबूत थी, वहीं बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों ने दरों में संभावित सख्ती की चिंता बढ़ाई है।

हालांकि भारत की आर्थिक वृद्धि अभी भी मजबूत बनी हुई है। सरकार के ताजा अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक GDP वृद्धि 7.7% रहने का अनुमान है।

निष्कर्ष

अगस्त में 4.82% खुदरा महंगाई और 9.92% थोक महंगाई ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई की चुनौती को फिर से उजागर कर दिया है। अब RBI की 7 अक्टूबर की MPC बैठक बेहद अहम होगी। क्या केंद्रीय बैंक रेपो रेट बढ़ाकर महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश करेगा या आर्थिक वृद्धि को देखते हुए दरें स्थिर रखेगा—इसका जवाब अक्टूबर की बैठक में मिल सकता है।

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