Breaking Newsविदेश

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची फिर इस्लामाबाद पहुंचे, अमेरिका से बातचीत की राह तलाशने में जुटा पाकिस्तान

अजय विक्रम सिंह

इस्लामाबाद: ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची दोबारा पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे हैं। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत का रास्ता तलाश रहा है।

अराघची इससे पहले इस्लामाबाद से रवाना होकर ओमान गए थे और इसके बाद रूस जाने वाले थे। उनकी दोबारा इस्लामाबाद वापसी को ईरान-अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान

ईरान ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ उसकी सीधी बातचीत नहीं हो रही है। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेश मध्यस्थ देशों के जरिए पहुंचाए जा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा है कि पाकिस्तान के जरिए दोनों पक्षों के विचार और चिंताएं एक-दूसरे तक पहुंचाई जा रही हैं।

पाकिस्तान इस पूरे कूटनीतिक प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार लगातार क्षेत्रीय तनाव कम करने और अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका ने भी बातचीत के लिए भेजे थे दूत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद भेजे जाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, बाद में ट्रंप ने इनकी यात्रा रद्द कर दी और ईरान के साथ बातचीत को लेकर प्रगति की कमी का हवाला दिया।

इसके बावजूद पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए कूटनीतिक संपर्क जारी रहने की उम्मीद बनी हुई है।

ईरान की शर्तें क्या हैं?

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ कूटनीति के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, लेकिन इसके लिए वॉशिंगटन को अपना रवैया बदलना होगा।

अराघची ने कहा है कि अमेरिका को विश्वास बहाल करने, सम्मानजनक तरीके से बातचीत करने और अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने की जरूरत है।

ईरान और अमेरिका के बीच मतभेदों में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना अहम मुद्दा

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद हैं। ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग से जुड़े मुद्दों को व्यापक बातचीत का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका यहां नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर दबाव बना रहा है।

इस जलमार्ग से होने वाला तेल परिवहन वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए होर्मुज से जुड़ा कोई भी तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।

ओमान और रूस भी कूटनीतिक प्रयासों में सक्रिय

ईरान-अमेरिका विवाद को सुलझाने की कोशिशों में पाकिस्तान के अलावा ओमान, कतर और रूस भी संपर्क में हैं। ओमान पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की मेजबानी कर चुका है। हाल के दिनों में क्षेत्रीय देशों ने तेहरान के साथ लगातार कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा है।

अराघची की रूस यात्रा भी क्षेत्रीय घटनाक्रम और मॉस्को के साथ समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्या फिर शुरू होगी ईरान-अमेरिका बातचीत?

अराघची का दोबारा इस्लामाबाद पहुंचना यह संकेत देता है कि कूटनीतिक रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच गहरे मतभेदों को देखते हुए तत्काल किसी समझौते की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।

ईरान लगातार कह रहा है कि वह अपनी संप्रभुता और अधिकारों से समझौता नहीं करेगा, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ठोस आश्वासन चाहता है।

ऐसे में अब निगाहें इस्लामाबाद में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर हैं। पाकिस्तान के जरिए यदि दोनों पक्षों के बीच भरोसा बहाल करने का कोई रास्ता निकलता है, तो यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Related Articles

Back to top button