राष्ट्रपति भवन में दिखेगी एमपी की आदिवासी कला, 15 अगस्त पर खास होगा बाग प्रिंट का रंग
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन का आयोजन इस बार देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का रंग दिखाएगा। मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध बाग प्रिंट कला को खास जगह मिली है। इसके जरिए मालवा-निमाड़ की पारंपरिक कला और कारीगरी की झलक देश-दुनिया के सामने आएगी।
15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में होने वाले ‘एट होम’ समारोह में मध्य प्रदेश की पारंपरिक कला आकर्षण का केंद्र बनेगी। इस खास आयोजन के लिए एमपी की प्रसिद्ध बाग प्रिंट का चयन किया गया है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान बाग प्रिंट के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही देश के दूसरे राज्यों की पारंपरिक कलाओं को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अलग-अलग लोक और आदिवासी परंपराओं को एक मंच पर प्रदर्शित करना है।
चार राज्यों की संस्कृति होगी प्रदर्शित
राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गोवा की लोक परंपराओं के रंग में सजाया जा रहा है। यहां अलग-अलग राज्यों के घर, आंगन और पारंपरिक विवाह स्थलों की झलक दिखाने की तैयारी है। इस पूरी सजावट के जरिए भारत की सामुदायिक संस्कृति और ग्रामीण जीवन को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
टेबल कवर के लिए चुना गया बाग प्रिंट
कार्यक्रम की सजावट में पारंपरिक कपड़ों को खास महत्व दिया गया है। निफ्ट दिल्ली की टीम इस पूरी व्यवस्था का समन्वय कर रही है। टेक्सटाइल डिजाइन की प्रोफेसर सुधा ढिंगरा के अनुसार, चारों राज्यों की पहचान से जुड़े पारंपरिक कपड़ों को टेबल कवर और अन्य सजावटी कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के लिए बाग प्रिंट को चुना गया है।
दूसरे राज्यों की कला भी बनेगी हिस्सा
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की सौरा टेक्सटाइल और डोकरा कला को भी प्रदर्शित किया जाएगा। महाराष्ट्र की पारंपरिक ‘खुन’ कपड़ा कला और गोवा के आदिवासी ‘कुनबी’ टेक्सटाइल को भी जगह दी गई है। इस तरह राष्ट्रपति भवन का सांस्कृतिक केंद्र चार राज्यों की अलग-अलग कलात्मक पहचान को एक साथ प्रस्तुत करेगा।
करीब 500 मेहमान होंगे शामिल
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले इस ‘एट होम’ समारोह में करीब 500 मेहमानों के शामिल होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, राजनीतिक हस्तियां, राजनयिक, राजदूत और विदेशी मेहमान भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। राष्ट्रपति भवन में होने वाला यह आयोजन सिर्फ राष्ट्रीय समारोह नहीं होगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक भी पेश करेगा।
आदिवासी विरासत को मिलेगा बड़ा मंच
इस आयोजन की खास बात यह है कि पारंपरिक और आदिवासी कलाओं को राष्ट्रपति भवन जैसे महत्वपूर्ण मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है। आईजीआरएमएस भोपाल की टीम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और इंस्टॉलेशन की तैयारी में जुटी है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अमिताभ पांडे के मुताबिक, चारों राज्यों की सामुदायिक संस्कृति को उनके घर, आंगन और विवाह परंपराओं के माध्यम से दिखाने की कोशिश की जा रही है।



