राज्यसभा में मनुस्मृति का जिक्र करते ही मचा हंगामा, खरगे के बयान पर भड़के जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मनुस्मृति संबंधी बयान पर जोरदार विवाद खड़ा हो गया। सत्ता पक्ष ने उनके दावों पर आपत्ति जताई, जबकि सभापति ने संबंधित टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने की बात कही और तथ्यों के प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा।
राज्यसभा में चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में बड़ी संख्या में पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर लागू करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग की। खरगे ने यह भी कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6 प्रतिशत खर्च होना चाहिए, जबकि सरकार इससे काफी कम खर्च कर रही है।
मनुस्मृति का जिक्र करते ही बढ़ा विवाद
अपने भाषण के दौरान खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की कुछ नीतियां उन्हें ‘मनुवादी सोच’ की याद दिलाती हैं। इसके बाद उन्होंने मनुस्मृति से जुड़े कुछ कथित उद्धरणों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसी सोच को शिक्षा व्यवस्था में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में आपत्तिजनक सामग्री लाई जा रही है और इसे हटाया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर भी टिप्पणी की। इन टिप्पणियों के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया।
जेपी नड्डा ने जताई कड़ी आपत्ति
सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खरगे के बयान का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणियां समाज में अशांति पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि खरगे ने मनुस्मृति का हवाला दिया है तो उन्हें उसका प्रामाणिक स्रोत (Authentication) भी प्रस्तुत करना चाहिए। नड्डा ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने तथ्यों से परे बातें कही हैं।
सभापति ने क्या कहा?
विवाद बढ़ने पर राज्यसभा के सभापति ने हस्तक्षेप किया और खरगे से अपने दावों के समर्थन में प्रमाण देने को कहा। सभापति ने यह भी कहा कि मनुस्मृति से संबंधित जिन टिप्पणियों पर विवाद हुआ है, उन्हें सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाएगा, जब तक उनकी प्रामाणिकता स्पष्ट नहीं हो जाती।
सुधांशु त्रिवेदी ने भी उठाए सवाल
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक ग्रंथ या उद्धरण का उल्लेख करते समय प्रमाण देना आवश्यक है। उन्होंने अपने तर्क के समर्थन में विभिन्न ऐतिहासिक संदर्भों और पुस्तकों का हवाला दिया तथा मनुस्मृति से जुड़े उद्धरणों की प्रमाणिकता स्पष्ट करने की मांग की। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सदन में एक पुस्तक दिखाते हुए कहा कि संबंधित सामग्री प्रकाशित है और उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
संसद में फिर गरमाई शिक्षा और विचारधारा की बहस
एंटी पेपर लीक बिल पर शुरू हुई चर्चा जल्द ही शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम, विचारधारा और मनुस्मृति जैसे मुद्दों तक पहुंच गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। जहां कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने विपक्ष पर तथ्यों से परे बयान देकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। अब इस पूरे विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है, जबकि सदन की कार्यवाही में दर्ज टिप्पणियों और उनके प्रमाण को लेकर भी बहस जारी रह सकती है।



